बिना पंजीकरण चल रहे 20 अस्पतालों को नोटिस जारी
- 15 दिन में देना होगा जवाब, सात दिनों में 150 अन्य अस्पतालों को जारी होंगे नोटिस, होगी सिलिंग
- जनपद में 170 से ज्यादा अस्पताल-क्लीनिकों का नहीं पंजीकरण
नंबर
584 निजी क्लीनिक और अस्पताल हैं जिले में
474 ने किया है पंजीकरण के लिए आवेदन
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। गौतमबुद्ध नगर में 170 से ज्यादा अस्पताल और निजी क्लीनिक बिना पंजीकरण के अवैध रूप से चल रहे हैं। मरीजों की जान खतरे में डालने वाले इन अस्पताल-क्लीनिकों को स्वास्थ्य विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक 20 को नोटिस जारी किए गए हैं। 15 दिन में नोटिस का जवाब देना होगा। इसके बाद सीलिंग की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
अस्पताल, नर्सिंग होम और क्लीनिक संचालित करने के लिए क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट 2010 के तहत पंजीकरण अनिवार्य है। पंजीकरण के लिए आवेदन की समय सीमा 30 जून को पूरी हो चुकी है। जिले में 584 अस्पतालों और निजी क्लीनिकों को मानक पूरे कर आवेदन करना था, लेकिन तय समय सीमा में 474 ने ही आवेदन किया। इनमें से 60 क्लीनिक और अस्पतालों के आवेदन मानक पूरे नहीं होने पर रद्द किए गए हैं।
जिला स्वास्थ्य विभाग के उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. चंदन सोनी ने बताया कि बिना पंजीकरण के चल रहे अस्पताल और क्लीनिकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अब तक 20 नोटिस जारी हो गए हैं, एक सप्ताह में अन्य 150 को भी नोटिस भेज दिए जाएंगे। नोटिस के माध्यम से पंजीकरण नहीं कराने की वजह पूछी गई है। जिनके आवेदन रद्द हुए हैं उनसे पूछा गया है कि कब तक खामियां सुधार ली जाएंगी। नोटिस के बाद भी कमियां दूर नहीं होने और पंजीकरण नहीं कराने पर इन अस्पतालों और क्लीनिकों को अवैध मानते हुए सीलिंग की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
जोखिम में मरीजों की जान
जिले में बिना पंजीकरण के कई अस्पताल और क्लीनिक धड़ल्ले से चल रहे हैं। इनके पास न तो प्रशिक्षित चिकित्सक हैं और न ही स्वास्थ्य कर्मी। फिर भी बुखार से लेकर ऑपरेशन तक का जिम्मा उठाकर मरीजों की जान जोखिम में डालने से नहीं चूकते। मरीजों की स्थिति गंभीर होने पर रेफर कर दिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गैर पंजीकृत क्लीनिक और पांच प्रतिशत के कोटे वाले भूखंडों, ग्रामीण आबादी और रिहायशी इलाकों में चल रहे हैं। इनमें अग्निशमन सुरक्षा, बाॅयोमेडिकल कचरा निस्तारण और प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का उल्लंघन हो रहा है।
इस बार प्रशासन के सख्त तेवर
क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट कमेटी के चेयरमैन जिलाधिकारी होते हैं। इसके अलावा तीनों प्राधिकरण के ओएसडी, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, डिप्टी सीएमओ सहित नौ सदस्य इस कमेटी में होते हैं। पिछले सप्ताह निजी अस्पताल और क्लीनिक संचालकों ने पंजीकरण में देरी का हवाला देते हुए जिलाधिकारी से मुलाकात की थी। जिले के अस्पतालों की तरफ से मामला उठाया गया था, लेकिन समिति की बैठक के दौरान इन अस्पतालों की ही कमियां पाई गईं। जिलाधिकारी के निर्देश पर ग्रेटर नोएडा के तीन अस्पतालों के आवेदन निरस्त कर दिए गए। साथ ही, 15 दिन में खामियां सुधारकर पंजीकरण नहीं कराने पर सीलिंग की चेतावनी भी दी गई।
एक्ट की जरूरी बातें
-अस्पताल, क्लीनिक खुद को पंजीकृत कराएं ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि लोगों को न्यूनतम सुविधाएं और सेवाएं दे रहे हैं।
-स्वास्थ्य सुविधाएं देने वाले सभी संस्थानों के लिए जरूरी है कि मरीजों से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ सिस्टम ओर मेडिकल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखें।
-संस्थानों का दायित्व है कि कोई रोगी आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचता है तो उसे वो सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं जिससे रोगी को स्टेबल किया जा सके।
-संस्थान अपनी सेवाओं की कीमत सरकार की निर्धारित सीमाओं के भीतर तय करें और इनको हिंदी व अंग्रेजी भाषाओं में अस्पताल में प्रदर्शित करें।
-एक्ट के मुताबिक मानकों का उल्लंघन होने पर अस्पताल का पंजीकरण रद्द होगा। एक्ट में जुर्माने का भी प्रावधान है।