लेकिन शहर के वाहन चालक प्रमाण पत्र बनवाने में आने वाले करीब 80 से 100 रुपये का खर्च बचाने के चक्कर में 10 हजार रुपये का जुर्माना भुगत रहे हैं। ट्रैफिक विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले सात माह में करीब 5900 वाहन चालकों को बिना प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र के वाहन दौड़ाते हुए पकड़ा गया है। पिछले सात माह में चालान का आंकड़ा करीब 12 गुना तक बढ़ गया है।
सात माह के दौरान बिन प्रदूषण जांच के पकड़े गए वाहनों की बात करें तो जनवरी में 552, फरवरी में 816, मार्च में 623, अप्रैल में 929, मई में 1009, जून में 755 और जुलाई में 1190 वाहन चालक बिना प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र के वाहन दौड़ाते हुए पकड़े गए। आशंका है कि करीब इतने ही और वाहन चालक ट्रैफिक विभाग की आंख में धूल झोंक कर बिना प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र के वाहन दौड़ा रहे हैं।
इस मामले को डीसीपी ट्रैफिक अनिल कुमार यादव का कहना है कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ लगातार जांच अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। इसी का नतीजा है कि बिना प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र दौड़ाने वाले वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। लोग चंद रूपये बचाने के लिए 10-10 हजार रूपये के भारी भरकम चालान भुगत रहे हैं। लोगों को खुद ही तय समयावधि के बाद अपने वाहनों की प्रदूषण जांच करानी चाहिए।