सुपरटेक अपकंट्री और गोल्फ कंट्री के वाणिज्यिक और संस्थागत प्रोजेक्ट की 83 हजार वर्गमीटर आवंटन को निरस्त किए जाने की तैयारी है। बिल्डर पर कुल 990 करोड़ का बकाया है। बकाया राशि नहीं देने पर यमुना प्राधिकरण (यीडा) जल्द आवंटन निरस्त कर सकता है। माना जा रहा है कि सोमवार को इस पर फैसला लिया जाएगा।
सुपरटेक के सेक्टर-22डी स्थित गोल्फ कंट्री प्रोजेक्ट और सेक्टर-17ए के अपकंट्री प्रोजेक्ट में 100-100 एकड़ के दो प्लॉट हैं। मामले में बिल्डर ने न तो अतिरिक्त मुआवजा जमा कराया और न ही प्रीमियम व लीज के रूप में बकाया राशि अदा की है। अधिकारियों ने बताया कि गोल्फ कंट्री प्रोजेक्ट में 20 हजार वर्गमीटर वाणिज्यिक और 24500 वर्गमीटर संस्थागत जमीन का आवंटन निरस्त किया जाएगा। प्रोजेक्ट पर 373 करोड़ प्रीमियम, 162 करोड़ अतिरिक्त मुआवजा और 40 करोड़ रुपये लीज के रूप में बकाया है। जबकि सुपरटेक के अपकंट्री प्रोजेक्ट में 13270 वर्गमीटर वाणिज्यिक और 25 हजार वर्गमीटर जमीन पर संस्थागत प्रोजेक्ट है।
प्रोजेक्ट पर 171 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुआवजा, 32 करोड़ लीज मद मंे और 212 करोड़ प्रीमियम बकाया है। दोनों मामलों में बिल्डर को तीन बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की वजह से आवंटन निरस्त करने की तैयारी की जा रही है। दोनों प्रोजेक्ट की फाइल तैयार हो गई है। माना जा रहा है कि सोमवार को फाइल पर हस्ताक्षर कर आवंटन निरस्त करने के बाद कब्जे के लिए टीम भेज दी जाएगी।
कई और बिल्डरों पर होगी कार्रवाई
कई बिल्डर और दूसरे प्रोजेक्टों के लिए आवंटित जमीन का बकाया जमा नहीं करने पर 15 नवंबर के बाद कार्रवाई की जाएगी। आवंटन निरस्त करके जमा राशि जब्त की जाएगी। इससे पहले भी अजनारा समेत कई बिल्डरों का आवंटन निरस्त किया जा चुका है।
नक्शा पास नहीं कराने पर ओमनिस बिल्डरका आवंटन निरस्त करने की तैयारी
सोमवार को सुपरटेक के अलावा ओमनिस बिल्डर का आवंटन निरस्त किया जा सकता है। बिल्डर को सेक्टर-22ए में 82 हजार वर्गमीटर जमीन आवंटित की गई थी। बिल्डर ने प्राजेक्ट का न तो नक्शा बनवाया और न ही बकाया धनराशि जमा की। कई बार नोटिस जारी करने पर पैसा जमा नहीं कराया गया। बिल्डर पर अतिरिक्त मुआवजे के 30 करोड़ रुपये बकाया है। जबकि लीज के रूप में 9 करोड़ रुपये बकाया है। बिल्डर को साल-2011 में 100 एकड़ का भूखंड आवंटित किया गया था। अब इन भूखंडों को मौजूदा समय की दर बेचा जाएगा। इससे प्राधिकरण को करोड़ों का लाभ होगा।