रोहतक। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की मौत की खबर ने एक बार फिर कारगिल युद्ध के जख्मों को हरा कर दिया है। मुशर्रफ को ही कारगिल हमले का मास्टरमाइंड माना जाता है। कारगिल योद्धाओं ने कहा कि तानाशाह की मौत उसकी करनी का फल है। सेना की 17 जाट रेजिमेंट के हुमायूंपुर निवासी पूर्व हवलदार सतवीर धनखड़ को आज भी वह मंजर बखूबी याद है। बटालियन 25 मई 1999 को द्रास सेक्टर पहुंची थी। उस समय सिर्फ इतनी जानकारी थी कि कुछ घुसपैठिए हैं। दुश्मन कौन, कहां व कितनी संख्या में है, इसकी कोई जानकारी नहीं थी। श्रीनगर से लेह जाने वाली सड़क पर 4875 पोस्ट पर कब्जा करना था। यहां से सड़क से गुजरते वाहन साफ नजर आते थे। मश्कोह वैली पर भी यहीं से नजर रखी जा सकती है। इसी रास्ते दुश्मन को रसद जा रही थी। बटालियन की चारों कंपनियों को हमले के लिए अलग टारगेट मिला। उनकी ब्रेव कंपनी को 4540 पर कब्जा करना था। हमने 26 को पहला सफल अटैक किया, जबकि दूसरी कंपनियों ने व्हेल बैक, पिंपल एक और दो पर कब्जा किया। सेना की 13 जेएंडके राइफल्स ने 4875 पोस्ट पर कब्जा किया। सेना को चार जुलाई को मिली सफलता के बाद दुश्मन ने हमें आगे नहीं बढ़ने दिया। इसके बाद दुश्मन की रसद और उन्हें मदद मिलने वाला मश्कोह नाले का रास्ता रोकने का लक्ष्य मिला। यह सफलता मिलने के बाद दुश्मन के हौसले पस्त हुए। यह लड़ाई ताउम्र याद रहेगी। कारगिल लड़ाई को 23 साल हो गए हैं। अब भी वह मंजर झकझोर देता है। उनका छोटा बेटा प्रवीण तीन साल पहले आर्टलरी यानी तोपखाना रेजिमेंट में क्लर्क पद पर नियुक्त होकर इन दिनों कारगिल में ही तैनात है। बड़ा बेटा नवीन एमटेक के बाद अपना काम कर रहा है।
ये हैं रोहतक के नौ जांबाज
1. बलवान सिंह, गांव जिंदरान
2. जसवीर सिंह, सिसरखास
3. समुंद्र सिंह, सांघी
4. राजवीर सिंह, लाखनमाजरा
5. कृष्णलाल कुंडू, टिटौली
6. सुरेश सिंह, मोखरा
7. जसवीर सिंह, सैमाण
8. विजय सिंह, सुंदरपुर
9. कुलदीप सिंह, महम
540 भारतीय सेनानियों की शहादत की वजह थे मुशर्रफ
रोहतक। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति एवं कारगिल युद्ध के विलेन परवेज मुशर्रफ की मौत को कारगिल योद्धाओं ने उसकी करनी का फल करार दिया है। कारगिल लड़ाई में सक्रिय भागीदारी निभाने व शहीद जवानों के परिजनों ने इस एक व्यक्ति को देश के करीब 540 अधिकारियों व सैनिकों की शहादत की वजह बताया है। उनका कहना है कि मुशर्रफ नहीं होते तो शायद जवान शहीद न होकर अपने परिवारों के साथ होते। कारगिल के इस विलेन की मौत पर हमारे योद्धाओं ने कहा कि सजा तो उसके देश से निष्कासित होने के साथ ही मिल गई थी। कई बीमारियों के चलते समय से पहले उसकी मौत हो गई। देर सबेर यही होना ही था।
जनरल परवेज मुशर्रफ, पूर्व पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष का शरारती दिमाग हमारे देश के लिए 1999 कारगिल युद्ध में घातक साबित हुआ। यह युद्ध पूर्ण रूप से जनरल परवेज मुशर्रफ की देन है। इस कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने का अवसर मिला था। पाक सेना के दांत खट्टे किए। इस युद्ध में हरियाणा से 69 सैनिक शहीद हुए। हमें इन वीरों पर गर्व है।
पूर्व सैनिक रणजीत सिंह देसवाल, जिला सैनिक बोर्ड
जनरल परवेज मुशर्रफ घटिया पाकिस्तानी राष्ट्रपति था। इसकी वजह से कारगिल का युद्ध हुआ। युद्ध में हमारे सैकड़ों जवान शहीद हुए। युद्ध में सेना अस्पताल में घायल जवानों की सेवा करते हुए भयावह मंजर देखा। इसे कभी नहीं भूल पाऊंगा। वीर शहीदों के बच्चों के दिल में अब शांति हुई है।
पूर्व हवलदार महेंद्र सिंह, आर्मी मेडिकल कोर्स
दिल्ली में जन्मा, आजादी के बाद पाकिस्तान का नागरिक व सेना प्रमुख एवं राष्ट्रपति बना तानाशाह मुशर्रफ आखिरी जमीन के दो गज नीचे पहुंच ही गया। अपनी जिद की बदौलत हमारे 500 से ज्यादा वीरों की शहादत की वजह बना परवेज कभी माफ नहीं किया जाएगा। उसे उसका अंजाम मिल गया है।
पूर्व हवलदार सतवीर धनखड़, हुमायूंपुर
कारगिल युद्ध हमारे लिए मान सम्मान व वीरों के बलिदान की याद दिलाने वाला है। यह युद्ध पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति एवं सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ की देन है। उसी की वजह से अनेक परिवारों से उनके बेटे, पिता व अपने छिन गए। मुशर्रफ को उसकी करनी का फल मिला गया है।
पूर्व सूबेदार सूरत सिंह पुनिया, सेक्टर चार
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने हमारे देश पर कारगिल युद्ध थोपने का काम किया। उसने जबरन हमारी सीमा में घुसकर हमारी धरती कब्जाने का प्रयास किया था, जिसे वीरों ने दुश्मन को खदेड़ कर वापस हासिल किया। यह युद्ध हमेशा याद रहेगा। इसमें वीरांगनाओं ने अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया।
सतवंती पत्नी पूर्व लांस नायक विजय कुंडू