-मेरठ। नंगलापातू में प्रस्तावित कैटल कॉलोनी में 885 पशु ही रख सकते हैं जबकि शहर में 20 हजार से ज्यादा पशु हैं। डेयरी संचालक एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र सिंह उपाध्याय एमडीए सही मायने में डेयरियों को स्थानांतरित करना चाहता है तो जल्द और कैटल कॉलोनी बनवाएं अन्यथा यह तो ऊंट के मुंह में जीरा वाली कहावत चरितार्थ होगी। मंगलवार को यह मुद्दा रखा जाएगा।
डेयरी संचालक एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र सिंह उपाध्याय ने कहा शहर की 15 किमी परिधि में 1040 से ज्यादा डेयरी हैं। एमडीए की लापरवाही से ही दो दशक से डेयरियां शहर की आबादी में चल रही हैं। दो दशक में न सिर्फ जमीन की कीमत बढ़ी है बल्कि जमीन का भी अभाव हो गया है। डेयरी संचालक बाहर जाना चाहते हैं ताकि शहर में गंदगी नहीं फैले। एमडीए नंगलापातू में 2.28 हेक्टेयर क्षेत्र में कैटल कॉलोनी बना रहा है जिसमें अधिकतम 885 पशु रखे जा सकते हैं। एमडीए का तर्क है कि उनके पास एक ही स्थान पर जमीन नहीं है तो फिर कैसे डेयरी बाहर जाएंगी। यदि एमडीए वाकई चाहता है कि डेयरियां बाहर जाएं तो छोटी-छोटी कैटल कॉलोनी बना दें। डेयरी संचालक अपनी सहूलियत से नजदीकी कैटल कॉलोनी में चले जाएंगे और एमडीए को कोई दिक्कत नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि एमडीए से अब नंगलापातू से बड़ी कालोनी बनाने की मांग की जाएगी। नंगलापातू जाने वाले डेयरी संचालकों की सूची एमडीए उपाध्यक्ष को देंगे और मवाना रोड, गढ़ रोड, हापुड़ रोड व परतापुर रोड पर भी कैटल कालोनी बनाने की मांग करेंगे।