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Noida News: जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में चार ग्रुपों का खून खत्म

Sat, 04 Feb 2023 12:36 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
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इटावा। गर्भवती महिलाओं को बिना डोनर के रक्त उपलब्ध कराने के निर्देश उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के दिए हैं लेकिन जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में चार ग्रुपों का खून ही नहीं है। ऐसे में अगर किसी को रक्त की जरूरत पड़ जाए तो हालात बिगड़ सकते हैं।
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शुक्रवार को जिला अस्पताल की ब्लड बैंक की पड़ताल करने पर पता चला कि 17 यूनिट खून ही बचा है। इनमें ए पॉजिटिव, ए निगेटिव, बी पॉजिटिव, ओ निगेटिव ब्लड नहीं है। जबकि एबी पॉजिटिव खून एक यूनिट, बी निगेटिव तीन यूनिट, ओ पॉजिटिव चार यूनिट व एबी पॉजिटिव नौ यूनिट बचा था।
ब्लड बैंक की काउंसलर रजनी निगम ने बताया कि अप्रैल 2022 से लेकर जनवरी 2023 तक कुल 30 रक्तदान शिविर आयोजित हुए। जिसमें 750 यूनिट ब्लड मिला। गत 29 जनवरी को राहतपुरा स्थित नेत्र चिकित्सालय में रक्तदान शिविर में आयोजकों ने 50 लोगों के रक्तदान करने की बात कही थी। लेकिन बड़ी मुश्किल से 12 यूनिट ब्लड ही मिल सका।
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रक्तदान शिविर लगाने के लिए स्कूल-कॉलेजों, स्वयं सेवी संस्थाओं व सरकारी कार्यालयों से निरंतर संपर्क कर काउंसलिंग की जाती है। जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को निशुल्क ब्लड उपलब्ध कराया जाता है। जबकि महीने में करीब 30 से 35 यूनिट ब्लड महिला अस्पताल में दिया जाता है। सीएचसी भरथना व जसवंतनगर में भी यहीं से रक्त भेजा जाता है। इसकी वजह इन दोनों स्थानों पर ब्लड स्टोरेज सेंटर हैं।
यदि सरकारी विभाग रक्तदान में सहयोग प्रदान करें तो समस्या इतनी गंभीर न हो। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), बीएसए कार्यालय, डीआईओएस कार्यालय, कृषि विभाग की ओर से रक्तदान शिविर लगाने को लेकर कोई संतोषजनक आश्वासन नहीं मिल सका है। जबकि वर्ष 2018-19 में जीएसटी कार्यालय की ओर से एक बार रक्तदान शिविर आयोजित होने के बाद दूसरा शिविर अभी तक नहीं लग सका है।

600 यूनिट ब्लड रखने की क्षमता
ब्लड बैंंक प्रभारी डॉ. नीतू द्विवेदी ने बताया कि ब्लड बैंक में 600 यूनिट ब्लड रखने की क्षमता है। हर महीने लगभग 400 यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है। इनमें से 350 एक्सचेंज किया होता है। सर्दी की वजह से कम लोगों ने रक्तदान किया। रक्त की मियाद 35 दिन होती है। जननी सुरक्षा योजना, बीपीएल कार्ड धारक, एचआईवी रोगी, लावारिस कैदी अथवा दिव्यांग आदि को निशुल्क ब्लड उपलब्ध कराया जाता है। ब्लड की मांग इतनी ज्यादा रहती है कि उसे पूरा करना मुश्किल होता है। एक समस्या यह भी है कि जो लोग रक्तदान करते हैं उन्हें जो रक्तदाता कार्ड प्रदान किया जाता है। वह एक साल पुराना कार्ड लेकर चले आते हैं। डॉ. नीतू द्विवेदी ने बताया कि ज्यादातर डोनर किसी नजदीकी के लिए ब्लड की मांग करते हैं।
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