बाजार में धड़ल्ले से बिक रहीं नकली एंटीबायोटिक दवाइयां
-12 एंटीबायोटिक दवाइयों के नमूने फेल, स्टोर संचालक और दवा कंपनियों पर दर्ज होगा मुकदमा
-महंगी होने के कारण बाजार में बढ़ रही है नकली एंटीबायोटिक दवाइयों की आपूर्ति
नवीन कुमार
ग्रेटर नोएडा। जिले कई मेडिकल स्टोर नकली दवाएं बेच रहे हैं। बीते करीब एक साल में 12 एंटीबायोटिक दवाइयों के नमूने फेल मिले हैं। इनमें बुखार और अन्य सामान्य बीमारियों में प्रयोग होने वाली पांच एंटीबायोटिक दवाइयां भी शामिल हैं, जो गुणवत्ता के मानकों पर खरी नहीं उतरीं। जांच के बाद औषधि विभाग सीजेएम कोर्ट में स्टोर संचालकों और कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी में है।
औषधि विभाग ने डाढ़ा गांव में बिना लाइसेंस संचालित मेडिकल स्टोर की जांच के दौरान एंटीबायोटिक दवाइयों के तीन नमूने लिए थे। इनमें से जिफी-0 और जिफी-200 का नमूना फेल हो गया है। जांच में दोनों एंटीबायोटिक दवा नकली निकली हैं। इनका प्रयोग संक्रमण के इलाज में किया जाता है। नोएडा सेक्टर-35 स्थित मोरना गांव के एप्स मेडिकल स्टोर से एक एंटीबायोटिक दवा का नमूना लिया था। यह दवा भी नकली निकली। नोएडा सेक्टर-73 के एक मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक इंजेक्शन का नमूना लिया गया, जिसकी गुणवत्ता मानकों से कम मिली है। वहीं, ग्रेटर नोएडा की ममता फार्मेसी से लिया गया एंटीबायोटिक दवा का नमूना भी नकली निकला है। नोएडा सेक्टर-26 स्थित मदर फार्मेसी से जिफी-200 का नमूना लिया गया था। यह दवा भी नकली निकली है। दादरी के मंगलम मेडिकोज स्टोर से लिया गया नमूना भी जांच में फेल हो गया। दनकौर के दिनेश किराना स्टोर से ऑक्सीटोसी इंजेक्शन का नमूना भी मानकों पर खरा नहीं उतरा है। औषधि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सभी मामलों की जांच पूरी हो गई है। जल्द ही सीजेएम कोर्ट में केस दर्ज कराया जाएगा। एंटीबायोटिक में मिलावट आने के पीछे इनका महंगा होना बड़ा कारण है।
अप्रैल 2021 से अभी तक 264 निरीक्षण
नकली दवाइयों की आपूर्ति बढ़ने के कारण औषधि विभाग ने अभियान चलाया हुआ है। पिछले साल अप्रैल 2021 से मार्च 2022 तक औषधि विभाग ने 112 निरीक्षण किए हैं। सभी जगह से 128 नमूने लिए थे। इनमें ज्यादातर एंटीबायोटिक दवाइयों के थे। नौ नमूने नकली निकले हैं, जबकि तीन दवाईयों की गुणवत्ता खराब मिली है। वहीं, अप्रैल 2022 से अभी तक 152 जांच हो चुकी हैं। यहां से 133 नमूने लिए गए हैं। करीब 70 की जांच रिपोर्ट आ चुकी है। तीन दवाइयां नकली और तीन की गुणवत्ता खराब मिली है।
जागरूकता के अलावा नहीं है दूसरा विकल्प
औषधि विभाग का कहना है कि आम जनता के पास असली या नकली दवाइयों की पहचान का विकल्प नहीं है। केवल जागरूकता ही नकली दवाओं से बचने का एकमात्र तरीका है। पंजीकृत मेडिकल स्टोर से ही दवा खरीदें और दवा खरीदते समय बिल अवश्य लें।
बार कोड से मिलेगी राहत
मेडिकल इंडस्ट्री की बड़ी कंपनियां दवाइयों पर बार कोड लगाने का काम कर रही हैं। बार कोड लगने के बाद दवाइयों की पहचान करना आसान हो जाएगा। बार कोड को स्केन कर असली दवा की पहचान की जा सकेगी।
कोविड के समय पकड़ी दवाइयां भी निकली नकली
जुलाई 2021 में कोविड के दौरान औषधि विभाग ने इकोटेक-तीन थाना क्षेत्र की एक कंपनी से बड़ी मात्रा में दवाइयां पकड़ी थी। जिनका प्रयोग कोविड के इलाज में किया जा रहा था। मौके से मिली चार एंटीबायोटिक और तीन एंटी वायरल दवाइयां भी नकली मिली थी। सॉल्ट के नाम पर केवल पाउडर मिला था। इन दवाइयों को मेरठ से लेकर मुंबई तक सप्लाई किया गया था।
एंटीबायोटिक दवाइयां काफी महंगी होती हैं। इस कारण नकली दवाइयां बाजार में आ रही हैं। अभियान चलाकर जांच की जा रही है। साथ ही, लोगों को भी बिना बिल के दवाइयां नहीं लेने की सलाह दी जा रही है। नकली दवाइयां बेचने वाले स्टोर संचालक और बनाने वाली फार्मा कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया जाएगा।
-वैभव बब्बर, औषधि निरीक्षक गौतमबुद्ध नगर