जिन किसानों की जमीन पर बसाया शहर, वहीं 33 साल से भटक रहे
ग्रेटर नोएडा। प्राधिकरण के खिलाफ 7 फरवरी को महांपचायत के लिए अधिक से अधिक किसानों को जुटाने के लिए एक बैठक घोड़ी-बछैड़ा में की गई। इस मौके पर किसान नेता डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि किसान 33 साल बाद समस्याएं दूर कराने के लिए प्राधिकरण कार्यालय जाकर धक्के खाते हैं। मगर प्राधिकरण अधिकारियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है। जमीन अधिग्रहण करने के बाद सबसे पहले किसानों को 6 फीसदी से लेकर 10 फीसदी के भूखंड और रोजगार दिलाना चाहिए। मगर प्राधिकरण अधिकारियों का किसानों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं है, जबकि पूरा विकास किसान की जमीन पर किया जा रहा है। संयोजक वीर सिंह नागर ने कहा कि किसान प्राधिकरण में अपने कार्यों के लिए अपमानित किया जा रहा है, प्राधिकरण अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। किसान इंद्रजीत सिंह ने कहा कि प्राधिकरण आबादी भूखंडों को लेकर किसानों को आपस में लड़ाने का कार्य कर रहा है। ब्यूरो