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Noida News: 2030 तक विश्व में दूसरे स्थान पर पहुंचेगा उपकरण उद्योग

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2030 तक विश्व में दूसरे स्थान पर पहुंचेगा उपकरण उद्योग
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अगले कुछ वर्षों में 50 फीसदी तक ग्रीन एनर्जी को अपना लेगा भारतीय निर्माण उपकरण उद्योग
बाैमा कॉन एक्सपो में भारतीय निर्माण उपकरण उद्योग के अध्यक्ष ने जताई इस वर्ष 15 फीसदी तेजी की उम्मीद

माई सिटी रिपोर्टर

ग्रेटर नोएडा। वर्तमान समय में भारतभर में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास हो रहा है। अगले वर्ष होने वाले चुनावों के चलते इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से बढ़ोतरी होने की संभावना है। वर्ष 2030 तक ऐसी तेजी बरकरार रही तो भारतीय निर्माण उपकरण निर्माता उद्योग दो लाख करोड़ रुपये के आंकड़े के साथ अमेरिका को पछाड़ते हुए दूसरे नंबर पर पहुंच सकता है। भारत ने वर्ष 2018 में जापान के इस उद्योग को पछाड़कर तीसरे पायदान पर जगह बनाई है। वर्ष 2022 में भारतीय निर्माण उपकरण निर्माता उद्योग ने लगभग एक लाख करोड़ रुपये का कारोबार किया है। भारतीय निर्माण उपकरण निर्माता एसोसिएशन के अध्यक्ष और वोल्वो सीई इंडिया के एमडी दिमित्रोव कृष्णन का कहना है कि इस दौरान करीब एक लाख करोड़ की मशीनें बिकीं लेकिन उद्योग की आशा इससे अधिक थी। इस वर्ष इंफ्रास्ट्रक्चर के कार्यों को देखते हुए आशा की जा रही है कि 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ रिकाॅर्ड 1.15 लाख करोड़ का कारोबार करेंगी।

साइंस बेस्ड उपकरणों को लाने के लिए किया समझौता

विश्वभर में वोल्वो सीएस इंडिया कंपनी ग्रीन ट्रांजेक्शन को लीड करना चाहती है। इसके लिए कंपनी ने साइंस बेस्ड उपकरणों को लाने के लिए समझौते किए हैं। वर्ष 2030 तक ग्रीन फ्यूल को अपनाते हुए विश्वभर में 50 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने का लक्ष्य लिया है, इसके अलावा उपकरणों को भी ग्रीन फ्यूल आधारित बनाने पर कार्य करेंगे। कंपनी ग्रीन एनर्जी तकनीक पर बड़ा निवेश कर रही है, चाहे वह बैटरी इलेक्ट्रिक तकनीक हो, हाईड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक, हाईड्रोजन आईसी इंजन तकनीक या बायो फ्यूल तकनीक हो। जल्द कंपनी बैटरी इलेक्ट्रिक उपकरण लाएगी।
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इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी रहे बरकरार

मौजूदा समय में जिस तरह से इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास हो रहा है, वह लगातार बना रहे तो इस उद्योग को फायदा मिलेगा। दूसरी मांग है कि ग्रीन ट्रांजेक्शन के लिए सरकार को उद्योग को सपोर्ट करना चाहिए। बहुत सी पुरानी मशीनें ऐसी हैं कि जिसमें किसी भी तरह का डीजल डाला जा सकता है। ऐसे में डिपार्टमेंट ऑफ हैवी इंडस्ट्रीज, पर्यावरण मंत्रालय और सड़क परिवहन मंत्रालय साथ में मिलकर काम करें तो ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा मिल सकता है। तीसरी मांग है कि हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक क्षेत्र में पैसेंजर वाहनों की तरह फेम कार्यक्रम बढ़ावा देने के लिए शुरू हुए रिसर्च एंड डेवलपमेंट कार्यक्रम और अन्य तरह की सब्सिडी देनी चाहिए, जिससे यह उद्योग बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध करा सके और दुनिया में जल्द दूसरे नंबर पर पहुंचे।
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मशीन चलाने की भी हो ट्रेनिंग, मिले प्रमाणपत्र

ट्रक चलाने के लिए मिले लाइसेंस के बाद हैवी मशीन चलाने का भी लाइसेंस मिल जाता है, जबकि हैवी ड्यूटी ट्रक चलाने से मशीन की जानकारी नहीं मिलती है। ऐसे में दुर्घटनाओं की संभावनाएं बनी रहती हैं। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर काउंसिल जो प्रमाणपत्र देती है, वह टेस्ट करने के बाद देती है। ऐसे में सरकार इस प्रमाणपत्र को अनिवार्य करे। इससे जितने भी कांट्रेक्टर होंगे वह अपने चालकों को प्रशिक्षित करेंगे और दुर्घटनाओं से बचा सकेंगे।
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