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संशोधित: आठ हजार कैंटीनों की गुणवत्ता परखी जाएगी

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आठ हजार कैंटीनों की गुणवत्ता परखी जाएगी
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-जांच के आधार पर कैंटीन को रेटिंग भी दी जाएगी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। अगर आप कैंटीन में खाने के शौकीन हैं तो यह खबर आपके लिए काम की है। जिला खाद्य आपूर्ति एवं औषधि प्रशासन विभाग जिले के करीब आठ हजार छोटे-बड़े कैंटीनों में जाकर खाने की गुणवत्ता परखेगा। साथ ही, जांच के बाद कैंटीन को रेटिंग भी दी जाएगी। जिस कैंटीन की रेटिंग जितनी अच्छी होगी, वहां का खाना उतना ही उत्तम गुणवत्ता वाला होगा। जिसे खाकर आप बीमार नहीं होंगे। कुछ माह पहले ही जिले के एक निजी स्कूल व बहुराष्ट्रीय कंपनी में खराब खाना खाने से कई लोग बीमार हो गए थे। जिसके कारण उन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा था।
जिले में अभी तक लोगों के लिए खानपान की सुविधा मुहैया कराने वाले कैंटीनों में गुणवत्ता का कोई पैमाना नहीं हैं। इसलिए कई बार खराब गुणवत्ता वाला सस्ता खाना खाने से लोग बीमार हो जाते हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। पहले चरण की जांच के लिए विभाग 50 से अधिक लोगों का खाना तैयार करने वाले कैंटीनों का चयन कर रहा है। इनकी जांच रिपोर्ट भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण को भेजी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर प्राधिकरण कैंटीन का सर्वे कर उन्हें रेटिंग जारी करेगा।
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इट यू राइट कैंपस
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अक्षय गोयल ने बताया कि जिले के कैंटीनों में गुणवत्ता जांच के साथ रेटिंग देने का काम इट यू राइट कैंपस के तहत पूरा किया जाएगा। कैंटीन की खानपान की गुणवत्ता से लेकर कैंपस की स्वच्छता का भी आंकलन किया जाएगा। जिसके बाद रेटिंग दी जाएगी। इससे न सिर्फ स्वच्छ खाना मिलेगा, बल्कि खाना खाने वालों को स्वच्छ माहौल भी मिलेगा।
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डिस्प्ले करनी होगी रेटिंग
सहायक आयुक्त खाद्य- द्वितीय अर्चना धीरान ने बताया कि इट यू राइट कैंपस के तहत खानपान की गुणवत्ता व स्वच्छता की रैकिंग मिलने के बाद संबंधित कैंटीन संचालको को रेटिंग को डिस्पले भी करना अनिवार्य होगा। इससे खानपान से पहले आप यहां की गुणवत्ता का सटीक आंकलन कर सकेंगे। इसके अलावा रेटिंग के आधार पर आप खुद भी तय कर सकेंगे कि यहां का खाना खाने लायक है या नहीं।
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