शामली के सुमित ने घायल होने के बाद भी नहीं मानी हार
कमर में बांध कर छात्रों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। भाई मुझे बचा लो कोचिंग सेंटर में आग लग गई है। मैं फंस गया हूं। सांस लेने में काफी परेशानी हो रही है... सुमित को जैसे ही दोस्त ने कॉल कर मदद मांगी तो वे कोचिंग सेंटर की तरफ भागे। सुमित ने जान जोखिम में डालकर दोस्त समेत 10 छात्रों को बचाया। उन्होंने दूसरी इमारत से छत पर जाकर दरवाजे का ताला तोड़ा। इसके बाद एक-एक कर कमर में रस्सी बांधकर छात्रों को ऊपर लाए। इस दौरान वे खुद चोटिल हो गए, लेकिन हार नहीं मानी वह छात्रों को बचाने में लगे रहे। हालांकि, जब उनकी हालात खराब हो गई तो नीचे पहुंचते ही बेहोश हो गए। इसके बाद उनका बाड़ा हिंदू राव अस्पताल में इलाज चल रहा है। शामली निवासी सुमित ने बताया कि तीन माह पहले ही यहां एसएससी की कोचिंग लेने आए हैं। कई लोग दुर्घटना के वक्त वीडियो बना रहे थे, लेकिन कोई मदद के लिए आगे नहीं आ रहा था। इसके बाद उन्होंने फैसला किया कि वे छात्रों की जान बचाएंगे। उन्हें इसका जज्बा सेना की भर्ती की तैयारी करते हुए आया था। सुमित ने बताया कि अगर इमारत से बाहर निकलने का रास्ता संकरा न होता तो और छात्रों को भी वह बचा सकते थे। कोचिंग संस्थान लाखों की फीस लेते हैं, इसके बावजूद सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं है।
कबाड़ी वाले बने मददगार
छात्र जब चीख पुकार करने लगे तो नीचे ही कबाड़ी वालों ने मजबूत रस्सी जुटाई और खिड़की की ओर उछाल दी। इससे छात्र रस्सी पड़कर नीचे की तरफ आ सके। ऊंचाई देखते हुए कबाड़ी वालों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर गत्ते, गद्दे, रद्दी जो भी बन पड़ा वह जमीन पर बिछा दिया, ताकि कम से कम चोट लगे।
वीडियो बनाते रहे तमाशबीन
दुर्घटना स्थल के पास कई लोग भयानक मंजर को देखते और वीडियो बनाते नजर आए, लेकिन मदद के लिए आगे नहीं बढ़े। ऐसे में वीडियो बनाने वाले लोगों में छात्रों को लेकर रोष है।