मौजूदा फायर सेफ्टी एक्ट में एजुकेशन प्लान में स्कूल, कॉलेज और डे-केयर सेंटर आते है
कोचिंग सेंटर को नियम से रखा गया है बाहर, सूरत में आग लगने के बाद उठे थे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। लापरवाही का आलम यह है कि राजधानी के एक भी निजी कोचिंग सेंटर के पास फायर विभाग की एनओसी नहीं है। दिल्ली फायर सेफ्टी एक्ट में कोचिंग सेंटरों को इससे बाहर रखा गया है। 24 मई 2019 को गुजरात के सूरत स्थित कोचिंग सेंटर में आग लगने के बाद दिल्ली के कोचिंग सेंटरों पर सवाल उठने लगे थे। इसके बाद खूब हंगामा हुआ, लेकिन समय बीतने के साथ ही सब हवा हवाई हो गया। फायर सेफ्टी एक्ट में स्कूल, कॉलेज, डे-केयर सेंटर को शामिल किया गया है, लेकिन कोचिंग सेंटर इससे बाहर हैं।
दमकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि कोचिंग सेंटर को एजुकेशन प्लान में शामिल कर लिया जाए तो इन पर नजर रखना आसान होगा। बाकी बिल्डिंगों की तरह इनकी भी नियमित जांच करवाई जा सकेगी। फिलहाल, ज्यादातर कोचिंग सेंटर मालिक इसका फायदा उठाकर हजारों छात्रों की भीड़ जुटा लेते हैं। कुछ मामले में जिन इमारतों की ऊंचाई 50 फुट या उससे ज्यादा है, ऐसी इमारतों के लिए निगम फायर विभाग की एनओसी लेना अनिवार्य कर देता है। इसके लिए खुद एमसीडी या दूसरी सिविक एजेंसी दमकल विभाग को एनओसी देने के लिए कहता है। बिल्डिंग का मालिक दमकल विभाग के दिशा निर्देशों का पालन अपनी इमारत में आग से बचाव के इंतजाम करवाता है, जिसके बाद निरीक्षण किया जाता है और एनओसी जारी की जाती है, लेकिन ज्यादातर कोचिंग सेंटर इस नियम का फायदा उठाकर बच जाते हैं।
दमघोंटू है ज्यादातर कोचिंग सेंटर के प्रवेश द्वार
मुखर्जी नगर, लक्ष्मी, मुनीरका, पटेल नगर, राजेंद्र नगर आदि जगह के कोचिंग सेंटर को देखें तो ज्यादातर में भेड़-बकरियों की तरह छात्रों को भरकर पढ़ाया जा रहा है। एक-एक बैच में 100 से लेकर 400 तक बच्चों को एक साथ बिठा दिया जाता है। कई कोचिंग सेंटर को पतली-पतली गालियों में बने हैं। यहां के प्रवेश द्वारों को देखें तो यह संकरे और दमघोंटू हैं। चाहकर भी इन पर कार्रवाई करने में प्रशासन अपनी असमर्थता जताता है। मुखर्जी नगर आरडब्ल्यूए के बीएन झा का कहना है कि बृहस्पतिवार हुए हादसे के बाद कुछ दिन इसे लेकर शोर होगा, लेकिन बाद में सब सामान्य हो जाएगा।