नोएडा एक्सटेंशन स्थित न्यूमेड सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के चिकित्सकों की टीम ने चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एक अत्यंत जटिल और जानलेवा हेटेरोटोपिक प्रेगनेंसी का सफल उपचार कर न केवल मां की जान बचाई, बल्कि दो स्वस्थ शिशुओं को भी सुरक्षित दुनिया में लाने में सफलता पाई।
हेटेरोटोपिक गर्भावस्था एक दुर्लभ स्थिति होती है, जिसमें एक भ्रूण गर्भाशय के भीतर और दूसरा पेट (एब्डॉमिनल कैविटी) में विकसित होता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार भारत में यह पहला रिपोर्टेड केस है, जो 29 सप्ताह और 1 दिन की गर्भावधि तक पहुंचा और सजीव प्रसव संभव हो पाई। जबकि विश्व का चौथा डॉक्यूमेंटेड मामला माना जा रहा है। इस जटिल केस को संभालने वाली डॉक्टरों की टीम में डॉ. नीतू सिंह, डॉ. छवी और डॉ. अमनदीप शामिल रहीं।
डॉक्टरों ने बताया कि मरीज को अत्यधिक उच्च जोखिम श्रेणी में रखा गया था। वह आरएच-नेगेटिव ब्लड ग्रुप, एनीमिया, कम प्लेटलेट काउंट, लिवर व किडनी की कार्यक्षमता में कमी और मूत्र मार्ग संक्रमण जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही थी। मरीज को तेज पेट दर्द और अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसको लगभग तीन माह तक यूरिनरी कैथेटर लगाया गया था।
हालत तेजी से बिगड़ने पर डॉक्टरों ने तत्परता दिखाते हुए आपातकालीन सिजेरियन ऑपरेशन किया। सर्जरी के दौरान यह सामने आया कि पेट में विकसित भ्रूण का प्लेसेंटा आंतों में असामान्य रूप से चिपका हुआ था, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था। बावजूद इसके, डॉक्टरों की कुशलता और टीमवर्क से ऑपरेशन सफल रहा।
गर्भवती महिला ने दो शिशुओं को जन्म दिया, जो वर्तमान में पूरी तरह स्थिर और स्वस्थ हैं। मां की हालत भी अब संतोषजनक बताई जा रही है। आगे के उपचार के तहत मरीज की आंतों की एनास्टोमोसिस की योजना बनाई गई है। इस उपलब्धि पर अस्पताल प्रबंधन ने डॉक्टरों की टीम को बधाई दी। इस मौके पर हॉस्पिटल के जीएम अनिरुद्ध, शशी शर्मा और एजीएम मुस्कान शर्मा भी उपस्थित रहीं।