नई दिल्ली। दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और उसके डॉक्टरों पर लगे मेडिकल लापरवाही के आरोप को खारिज कर दिया है। आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता अपने दावे को साबित करने के लिए कोई ठोस सुबूत या विशेषज्ञ राय पेश नहीं कर सका। आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता के दावे केवल अस्पष्ट आरोप हैं, जिनका कोई चिकित्सकीय प्रमाण नहीं है। आयोग के मुताबिक इन आरोपों से मेडिकल लापरवाही का कोई ठोस आधार नहीं बनता। आयोग ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने किसी विशेषज्ञ की रिपोर्ट या विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं किया, जिससे यह साबित हो सके कि इलाज में लापरवाही हुई। ब्यूरो