शातिरों ने ऑनलाइन हनीट्रैप में फंसाकर सुरक्षाकर्मी की जान ले ली। सुरक्षाकर्मी की मौत के बाद भी शातिर परिजनों को ब्लैकमेलिंग करते रहे। मामले में एक साल तक पुलिस ने रिपोर्ट नहीं दर्ज की। इस पर पीड़ित परिवार ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश एफआईआर दर्ज की गई है।
ऑनलाइन हनीट्रैप के जाल को पुलिस नहीं तोड़ पा रही है। जबकि साइबर ठगी का ये जाल लोगों की जान तक ले रहा है। ग्रेनो वेस्ट की गौड़ सिटी-1 निवासी सुरक्षाकर्मी अनिल कुमार सिंह (58) को एक युवती समेत पांच आरोपियों ने ऑनलाइन हनीट्रैप के जाल में फंसाया और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर कई बार रुपये वसूले।
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इससे परेशान होकर अनिल कुमार सिंह ने जान दे दी। इसके बावजूद आरोपियों की ब्लैकमेलिंग जारी रही। उनके बेटे आदित्य ने केस दर्ज कराने के लिए चौकी से लेकर थाने के चक्कर लगाए लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। परेशान होकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया अब कोर्ट के आदेश पर बिसरख कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की है।
गौड़ सिटी-1 जे-7 एवेन्यु निवासी आदित्यराज ने बताया कि उनके पिता अनिल कुमार सिंह सोसाइटी में ही सुरक्षाकर्मी थे। आठ जून 2021 को लापता हो गए थे। तभी पुलिस को सूचना दी गई। 10 जून 2021 को बिसरख कोतवाली में उनकी गुमशुदगी दर्ज कर ली गई। आरोप है कि उन्हें तलाशने में गंभीरता नहीं बरती गई। उनके पिता का शव बादलपुर रेलवे ट्रैक के पास पड़ा मिला। उनके अंतिम संस्कार के बाद अनिल कुमार सिंह के मोबाइल पर दो बार आरोपियों ने कॉल कर फिर से वीडियो वायरल करने की धमकी देकर रुपयों की मांग की।
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तब जाकर आदित्यराज व उनके परिजन को अनिल कुमार सिंह के ब्लैकमेलिंग से तंग आकर जान देने का पता चला। इस गंभीर मामले में शिकायत के बावजूद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी। लेकिन अब कोर्ट के आदेश पर कॉल कर ब्लैकमेलिंग करने वाले विक्रम सिंह राठौड़, बॉबी यादव, रूचि शर्मा, हेमंत मल्होत्रा, संजय सिंह को नामजद कर रिपोर्ट दर्ज की गई है।
आदित्यराज का कहना है कि गुमशुदगी दर्ज होने के बावजूद भी उनके पिता को पुलिस ने नहीं ढूंढा। परिजन स्वयं सीसीटीवी फुटेज आदि खंगालकर उनकी तलाश में जुटे थे। 11 जून 2021 को उन्हें बादलपुर थाना क्षेत्र के रेलवे ट्रैक के पास अनिल कुमार सिंह का शव मिलने और पोस्टमार्टम पर भेजने की जानकारी हुई।
तत्कालीन पुलिस अधिकारियों पर भी आरोप
पीड़ित ने बताया कि आरोपियों के अनिल कुमार सिंह की मौत के बाद भी कॉल कर ब्लैकमेलिंग करने और रुपये लेकर दिल्ली आने की बात कही थी। उस दौरान बिसरख कोतवाली और चौकी पुलिस को इसकी जानकारी दी गई। लेकिन उन्होंने तब भी आरोपियों को पकड़ने का प्रयास नहीं किया और पीड़ित को यह कहकर टरका दिया कि आरोपी झूठ बोल रहे हैं, वह वहां नहीं मिलेंगे।
हनीट्रैप की शिकायत करने से कतराते हैं पीड़ित
ऑनलाइन हनीट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेलिंग का यह पहला मामला नहीं है। इस तरह के सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं। इस मामले में आरोपी किसी युवती का फोटो लगाकर फेसबुक आदि से किसी भी व्यक्ति से दोस्ती कर लेते हैं और फिर वीडियो कॉल कर उनकी या तो अश्लील वीडियो बना लेते हैं या फिर एडिट कर तैयार कर लेते हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित बदनामी के डर से परिजन या पुलिस को जानकारी देने से भी कतराते हैं।
ऑनलाइन हनी ट्रैप से ऐसे बचें
- अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल-अकाउंट को लॉक कर रखें।
- किसी भी अंजान युवती आदि की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें।
- कोई चैटिंग या वीडियो कॉल आए तो उसे ऐसेप्ट न करें।
- ब्लैकमेलिंग करने पर तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें।
कोर्ट के आदेश पर इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई। आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी की जाएगी। - रामबदन सिंह, डीसीपी सेंट्रल जोन