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Noida News: जीवन के लिए संघर्ष कर रहा माधव, नेताओं का भी नहीं पसीजा दिल

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जीवन के लिए संघर्ष कर रहा माधव, नेताओं का भी नहीं पसीजा दिल
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गौतमबुद्ध नगर का वोटर नहीं होने के कारण हालचाल जानने का भी नहीं किया प्रयास
मासूम की जान बचाने के प्रयास में जुटे चिकित्सक, न्याय के लिए भटक रहे परिजन

माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जेवर के निजी अस्पताल में करंट से झुलसकर दोनों हाथ गंवाने वाले मासूम माधव दिल्ली के एम्स में जीवन के लिए मौत से संघर्ष कर रहा है। वहीं हादसे के नौ दिन बाद भी सांसद डॉ. महेश शर्मा, जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह या फिर किसी जनप्रतिनिधि का दिल मासूम की हालत देखकर नहीं पसीजा है। किसी नेता ने मासूम व परिजन की मदद करना तो दूर हाल जानने का भी प्रयास नहीं किया है। परिजन न्याय की आस के लिए सरकारी अफसरों के दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें न्याय की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। परिजन ने शुक्रवार को मुख्य चिकित्साधिकारी से मुलाकात की। परिजन का कहना है कि उन्होंने यह कहकर टरका दिया कि वह इस मामले में अब कुछ नहीं कर सकते आप पुलिस से मिलिए।

अलीगढ़ के दीवा हामिदपुर निवासी योगेंद्र चौहान के छह साल के बेटे माधव का जेवर के चौधरी मेडिकेयर अस्पताल में 23 जून को हाईटेंशन लाइन के करंट से झुलसने के बाद दोनों हाथ गंवाने पड़े थे। शुक्रवार को योगेंद्र ने बताया कि माधव के दिमाग व शरीर के अन्य अंग में खून पानी बनकर जमा हो गया है। डाॅक्टर हर दिन बेटा की जांच कर रहे हैं। ऑपरेशन के संबंध में डाॅक्टर एक-दो दिन में निर्णय लेंगे। माधव की जान पर संकट बना हुआ है। इसके बावजूद पुलिस-प्रशासनिक व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अब कोई कार्रवाई और मदद नहीं की।
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‘अस्पताल सील नहीं, अफसरों ने झूठ बोला’
जेवर (संवाद)। माधव के पिता योगेंद्र चौहान का आरोप है कि चौधरी मेडिकेयर को सील करने के बारे में स्वास्थ्य अधिकारियों ने झूठ बोला है। शनिवार को सीएमओ कार्यालय के पास उन्हें अस्पताल का संचालक मिला और धमकी दी। इसके बाद परिजन चौधरी मेडिकेयर पहुंचे तो अस्पताल खुला था। वहां मरीज मौजूद थे और कर्मचारी काम कर रहे थे। जबकि दमकल की एनओसी नहीं होने और अस्पताल के रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण नहीं होने के कारण अस्पताल सील किया गया था।
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