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सोनीपत, हरियाणा सहित सभी केंद्रों के ध्यानार्थ::: सोनीपत की कंपनी में लटका ताला, चैटिंग में मिली लेनदेन की चैटिंग

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सोनीपत की कंपनी में लटका ताला, चैटिंग में मिली लेनदेन की जानकारी
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- कंपनी मालिक से पूछताछ व गिरफ्तारी को हरियाणा पहुंची गौतमबुद्धनगर पुलिस



- साइमन कपड़ों में छिपाकर कूरियर के जरिये देश-विदेश भेजता था सिंथेटिक ड्रग्स



जेपी शर्मा



ग्रेटर नोएडा। थीटा-2 सेक्टर और मित्रा सोसाइटी के मकान में दो सिंथेटिक ड्रग्स फैक्टरी का भंडाफोड़ करने के बाद पुलिस ने सोनीपत स्थित दवा कंपनी में दबिश दी, लेकिन यहां ताला लटका मिला। मुख्यारोपी चिडी अजिग्वा व अन्य आरोपियों से पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली है कि आरोपी सिंथेटिक्स ड्रग्स तैयार करने के लिए इसी कंपनी में एफेड्रिन लेकर आते थे। अब पुलिस कंपनी संचालक की तलाश में जुटी है। इसके अलावा पुलिस को रुपयों के लेनदेन के संबंध में कुछ चैटिंग व विदेशी खातों की जानकारी भी मिली है।
पुलिस को यह भी पता चला है कि मंगलवार को गिरफ्तार किया गया आरोपी साइमन अपने साथियों के साथ ग्रेनो की फैक्टरी में तैयारी की गई ड्रग्स को कूरियर के जरिये कपड़ों के निर्यात की आड़ में पॉलीथीन में छुपाकर देश-विदेश में आपूर्ति करता था। मुख्यारोपी चिडी अजिग्वा को पुलिस ने 16 मई को ही थीटा-2 सेक्टर स्थित मकान में चल रही फैक्टरी से ही गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन आरोपी शुरूआत में गुमराह करता रहा। जब आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई तो आरोपी ने मित्रा सोसाइटी में संचालित हो रही फैक्टरी के अलावा सिंथेटिक्स ड्रग्स आदि बनाने के लिए जुटाये जा रहे कैमिकल आदि के संबंध में जानकारी दी।
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आरोपी ने पुलिस को बताया कि एमडीएमए मैथाफीटामाइन सिंथेटिक ड्रग्स बनाने में एफेड्रिन की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। इसका लाइसेंस देश में गिनती की कंपनियों के पास है। वे हरियाणा के सोनीपत स्थित कैमिकल फैक्टरी से एफेड्रिन लेकर आते हैं। इसके बाद एक पुलिस टीम हरियाणा के सोनीपत के लिए रवाना कर दी गई। हालांकि अभी तक पुलिस को फैक्टरी संचालक नहीं मिल पाया है। ये भी संभावना है कि फैक्टरी के कर्मचारी आरोपियों को एफेड्रिन उपलब्ध करा रहे हों। इसके अलावा पुलिस चार राज्यों दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और गोवा में ड्रग्स आपूर्ति का जिम्मा संभालने वाले दिल्ली के वसंत कुंज निवासी नाइजीरियाई माइकल व उसके साथियों की भी तलाश रही है।







पाउडर और क्ले के रूप में की आपूर्ति:



पुलिस का कहना है कि आरोपी साइमन अपने साथियों के साथ मिलकर कपड़े के बीच ड्रग्स पाउडर या क्ले को कई पॉलीथीन से लपेटकर रख देते थे। जिससे इसकी दुर्गंध बाहर न आए और इसकी पहचान न हो सके। इसके बाद ये इन पैकेट को बाइक व कार के जरिये कूरियर का काम करने वालों तक पहुंचा देते थे। इसके बाद ड्रग्स दिल्ली-एनसीआर व पूर्वोत्तर के राज्यों, मुंबई व इसके बंदरगाहों से कार्गो कंपनी के माध्यम से बर्मा, म्यांमार आदि स्थानों पर पहुंच जाते थे।



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हवाला के जरिये रुपयों के लेनदेन की आशंका :



आरोपियों के तीन साल से ड्रग्स फैक्टरी चलाने की बात सामने आ रही है और अब तक कई सौ करोड़ रुपये की ड्रग्स की खरीद फरोख्त कर चुके हैं। इनकी कई चैटिंग में हजारों रुपयों के लेनदेन की जानकारी मिली है। आरोपी अवैध रूप से रह रहे थे, इसके चलते वह भारत में अपने खाते नहीं खुलवा पाए। हालांकि इनसे जुड़े कुछ विदेशी खातों की जानकारी पुलिस को मिली है, लेकिन इनकी डिटेल मिलना आसान नहीं है। वैसे विदेशी खातों से भारत में पैसा लाना आसान नहीं है। ऐसे में आशंका ये भी है कि आरोपी विदेश से रुपया मंगाने के लिए मनी ट्रांसफर करने वालों, हवाला का सहारा ले रहे हों।
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2018 की कार्रवाई के बाद सक्रिय होने की आशंका:



नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड ने वर्ष 2018 में 1818 किलो स्यूडोएफेड्रिन ड्रग्स पकड़ी थी। इसकी कीमत 400 करोड़ रुपये बताई गई थी। एनसीबी ने दिल्ली एयरपोर्ट से एक महिला को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर तीन अन्य अफ्रीकी नागरिकों को ग्रेनो में एक पुलिस अधिकारी के मकान में चल रही फैक्टरी का खुलासा किया था। आशंका है कि अब पकड़े गए आरोपी इसी गिरोह से जुड़े हों या फिर उनकेे जेल जाने के बाद सक्रिय हो गए हों।
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