सुंदर भाटी पर हमला करने वाला रणदीप गिरोह का शार्प शूटर जुगला गिरफ्तार
- ठेके कब्जाने के लिए बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर से पांच लाख की रंगदारी मांगने पर कसा शिकंजा
- एक लाख का इनाम हाेने के बावजूद पूर्व में नहीं चढ़ा था पुलिस के हत्थे, कोर्ट में किया था सरेंडर
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा /दादरी। रणदीप भाटी के लिए हत्या करने, ठेके कब्जाने और रंगदारी वसूलने के आरोपी शार्प शूटर जोगेंद्र उर्फ जुगला और उसके साथी देवेंद्र नागर को दादरी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी रणदीप भाटी का नाम लेकर चिटहेरा गांव के बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर से पांच लाख की रंगदारी मांग रहा था। जोगेंद्र वर्ष 2011 में साहिबाबाद में एक विवाह समारोह मेें गैंगस्टर सुंदर भाटी पर हुए जानलेवा हमले में भी शामिल था। उस मामले एसटीएफ ने जुगला के पा से एके-47 बरामद की थी। जुगला पर हत्या, हत्या की कोशिश, रंगदारी आदि के 32 केस दर्ज हैं।
चिटहेरा के बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर को दादरी के शिव नादर विवि में कई साल से निर्माण के लिए आपूर्ति का ठेका मिला हुआ है। शनिवार को गिरफ्तार किए गए देवेंद्र नागर ने सप्लायर को शिव नादर विवि का ठेका छोड़ने की धमकी दी थी। बाद में देवेंद्र नागर के कहने पर जोगेंद्र ने कॉल कर धमकी दी और ठेका नहीं छोड़ने की एवज में पांच लाख की रंगदारी मांगी थी। आरोपी ने टोकन मनी के रूप में पचास हजार रुपये वसूल लिए थे। इसके बाद आरोपी शेष रकम लेने के लिए कॉल कर रहा था। पुलिस ने घेराबंदी कर पहले देवेंद्र को गिरफ्तार किया। बाद में पुलिस ने जोगेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह रणदीप भाटी के इशारे पर रंगदारी वसूल रहा था। मामले में पुलिस ने रणदीप भाटी पर भी केस दर्ज किया है। आरोपी रंगदारी वसूलने के लिए स्कोर्पियो में सवार होकर गया था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से रंगदारी के दस हजार रुपये, पिस्टल व स्कार्पियो बरामद की है। जुगला पर पूर्व में एक लाख का इनाम था लेकिन पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई थी। लगभग तीन साल पहले आरोपी ने जिला न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। जेल से छूटने के बाद वह फिर से वारदात करने लगा।
मुठभेड़ में मारे गए नगला का साथी है जुगला
रणदीप भाटी के शूटर हापुड़ पुलिस की मुठभेड़ में मारे गए मनोज नगला और जुगला दोनों साथी हैं। रणदीप भाटी के जेल में होने के कारण उसके इशारे पर दोनों ने क्षेत्र में रंगदारी व ठेके कब्जाने का जाल बुना था। मनोज नगला टोल कर्मियों को धमकाकर बड़े स्तर पर बिना शुल्क दिए वाहन निकलवाने का भी काम करता था। आशंका है कि मनोज नगला के हापुड़ पुलिस की मुठभेड़ में मारे जाने के बाद जुगला उसके काम भी करने लगा था। आरोपियों के डर से अधिकांश पीड़ित इनकी शिकायत पुलिस से नहीं कर पाते। पुलिस ने भी जुगला से ये पता करने का प्रयस किया कि उनका गिरोह किसी और से रंगदारी तो नहीं वसूल रहा लेकिन दादरी थाना प्रभारी का कहना है कि आरोपी ने मुंह नहीं खोला।