एयरपोर्ट के पास 500 एकड़ में बसाई जाएगी जापानी टाउनशिप
- इसी माह आएगी भूखंड योजना, यमुना प्राधिकरण ने सेक्टर-32 और सेक्टर-10 में जमीन की चिह्नित
- प्रत्येक कंपनी को कम से कम 100 करोड़ रुपये का करना होगा निवेश, तभी मिलेगी उद्योग के लिए जमीन
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। विदेशी निवेश नीति बनने के बाद यमुना प्राधिकरण ने एयरपोर्ट के पास 500 एकड़ में जापानी टाउनशिप बनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इसे औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें एक ही परिसर में सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जापान की 11 कंपनियों ने क्षेत्र का दौरा कर जमीन चिह्नित करा दी है। जल्द ही इस टाउनशिप के लिए योजना भी लांच कर दी जाएगी।
दरअसल, लखनऊ में हुए वैश्विक निवेश सम्मेलन में जापान के औद्योगिक समूह की ओर से एयरपोर्ट के पास 500 एकड़ भूमि पर जापानी सिटी बसाने की इच्छा व्यक्त की थी। हालांकि एफडीआई पालिसी नहीं बनने के कारण मामला अधर में था। अब सरकार ने एफडीआई पालिसी बना दी है। जिसके बाद जापान के औद्योगिक समूहों की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी से मिलकर एक बार फिर प्रस्ताव दिया गया। शासन के निर्देश पर यीडा ने 500 एकड़ भूमि सेक्टर-10 और सेक्टर-32 में चिह्नित की है।
इसमें सेक्टर-32 में 500 एकड़ भूमि दी जाएगी। यहां पर सेमीकंडेक्टर, चिप, कैमरा, एआई इक्यूपमेंट और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद बनाने वाली कंपनियां आएंगीं। विदेशी कंपनियां यहां 1000 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेंगी। इससे पांच हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। 15 नवंबर के बाद सशर्त एक योजना लाई जाएगी, जिसमें केवल जापान की कंपनी ही भाग ले सकेंगी। सेक्टर-10 और सेक्टर-32 में जिस जमीन पर यह योजना लाई जाएगी, वहां पर जमीन की जांच भी कराई जा चुकी है।
इन कंपनियों में काम करने वाले श्रमिकों और अधिकारियों को सारी सुविधाएं मिल सकें, इसके लिए मिश्रित भू उपयोग की भी छूट दी जाएगी। इन कंपनियों को प्रदेश का जीएसटी नहीं देनी होगी और श्रमिकों के निवास पर 10 करोड़ रुपये सरकार खर्च करेगी। साथ ही आरएंडडी के लिए दो करोड़ रुपये दिए जाएंगे। बिजली डयूटी पर भी पांच वर्ष तक 100 फीसदी छूट प्रदेश सरकार से मिलेगी और 500 लोगों को प्रशिक्षण देने के लिए प्रति व्यक्ति हर माह पांच हजार रुपये भी सरकार देगी।
क्या है एफडीआई
भारत दूसरे देशों से निवेश लाने और यहां पर उनको स्थापित कराने के लिए सरकार ने एक नीति बनाई है। इस पूर्ण रूप से विदेशी निवेश लाने के लिए नीति बनाई है। इसे फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट या एफडीआई भी कहते हैं। इन कंपनियों को कम से कम 100-100 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा, तभी उनको यहां पर कारोबार शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।
वैश्विक निवेश सम्मेलन में जापान की कंपनियों ने यहां पर उद्योग लगाने की इच्छा जाहिर की थी। अब एफडीआई पालिसी लागू होने के बाद जापान की 11 कंपनियों ने जमीन देखकर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब उनकी टाउनशिप के लिए जमीन लाई जाएगी। - डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ, यमुना प्राधिकरण।