ग्रेटर नोएडा। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सोमवार को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के विरोध में प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी कार्यालय में सौंपा। जिलाध्यक्ष अशोक यादव ने बताया कि शिक्षकों और संघ की मांग है कि इस अनिवार्यता को हटाया जाए। उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय के अनुसार सभी सेवारत शिक्षकों के लिए उनकी नियुक्ति की तिथि चाहे जो भी हो शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य कर दिया गया है। इस निर्णय ने देशभर के लाखों शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा और आजीविका को संकट में डाल दिया है। जिला महामंत्री अजयपाल नागर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से टीईटी लागू हुआ। उससे पहले टीईटी होता ही नहीं था, इसलिए टीईटी उससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों की टीईटी मुक्त रखा जाए। शिक्षकों ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना जितना आवश्यक है, उतना ही आवश्यक उनके अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना भी है। इस अवसर पर जिला संगठन मंत्री ललिता पालीवाल, सौरभ रुहेला ,शेखर कौशिक ,विजय नागर, सुनील कुमार ,रुचि चौहान ,रणधीर सिंह ,राहुल भाटी ,ब्रजेश सिंह , मोहित शर्मा ,सुमित ,कुलदीप सक्सेना ,श्वेता श्रीवास्तव ,सीमारानी, निरुपमा मिश्रा ,मधु ,पुन तेवतिया ,अनुपमा मिश्रा ,अनामिका मिश्रा ,बॉबी चौहान ,जनपद के कई सौ शिक्षक शिक्षिकाएं शामिल रहे। ब्यूरो