फोनरवा की अंतिम मतदाता सूची जारी होते ही गर्माया मुद्दा
-पिछली सूची पर उठी 10 आपत्तियों में से नौ खारिज, विपक्षियों के निशाने पर चुनाव अधिकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। फेडरेशन ऑफ नोएडा रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की अंतिम मतदाता सूची जारी होते ही विपक्षी पैनलों के निशाने पर आ गई है। विपक्षी व उनके समर्थक ने चुनाव अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। आरोप है कि चुनाव पुरी तरह से वर्तमान फोनरवा अध्यक्ष योगेंद्र शर्मा और महासचिव केके जैन के इशारे पर हो रहा है। इसलिए ही 10 आपत्तियों में से नौ को खारिज कर दिया गया है।
मतदाता सूची को लेकर सेक्टर-51 आरडब्ल्यूए महासचिव संजीव कुमार का कहना है चुनाव अधिकारी मात्र कठपुतली हैं। उन्हें पीछे से कंट्रोल किया जा रहा है। हम सब मिलकर डिप्टी रजिस्ट्रार से शिकायत करेंगे और वर्तमान प्रक्रिया को भंग करने व डिप्टी रजिस्ट्रार की निगरानी में चुनाव कराने की मांग करेंगे। पुरानी मतदाता सूची में कुल दस आपत्तियां दर्ज की गई थीं। इसमें सिर्फ सेक्टर-39 की नई आरडब्ल्यूए कार्यकारिणी का नाम न जोड़ने की आपत्ति पर अमल किया गया और नाम जोड़ दिया गया। पवन गोयल का कहना है कि सेक्टर-11, 108 में पदमुक्त किए गए अंजना भागी और सुरेश छाबड़ा के केस में निजी स्वार्थ साफ तौर पर नजर आता है। छाबड़ा योगेंद्र शर्मा विरोधी है तो उन्हें मतदान के अधिकार से हटा दिया गया, वहीं योगेंद्र समर्थक भागी को पदमुक्त होने के बाद भी पद पर बने रहने दिया।
हालांकि केके जैन ने इन सब आरोपों को बेबुनियाद बताया है और कहा कि चुनाव में हमारी कोई दखल नहीं है। यह सारे फैसले चुनाव अधिकारी ने अपने विवेक से लिए हैं। वहीं चुनाव अधिकारी सेवानिवृत्त कर्नल शाशि वैद्य का भी कहना है कि सभी आपत्तियों पर कानून के दायरे में ही फैसला किया गया है। चुनाव के लिए नामांकन पत्र बुधवार को जारी किए जाएंगे।
फोनरवा में योगेंद्र शर्मा ने संस्थापक सदस्यों के साथ भी दोहरा रवैया अपनाया। वहीं केके जैन को चुनाव अधिकारी को मतदाता सूची सौंपते समय ही संस्थापक सदस्यों का नाम जोड़ देना चाहिए था। अगर वर्तमान अध्यक्ष और महासचिव का बस चले तो यह सारे विरोधियों को मतदाता सूची से बाहर कर दें।
राजीव गर्ग, अध्यक्ष प्रत्याशी