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Noida News: अंसल की प्रॉपर्टी पर इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड का अधिकार

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अमर उजाला ब्यूरो
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गुरुग्राम। सेक्टर-91 स्थित अंसल प्रॉपर्टीज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की फर्नहिल सोसाइटी के मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने पूरे मामले को भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) को सौंप दिया है। ट्रिब्यूनल ने कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर को निलंबित करके सारी शक्तियां आईबीबीआई को दे दी हैं। अब आईबीबीआई निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए कोई समाधान योजना बनाएगा या फिर संपत्तियों को बेच कर निवेशकों का पैसा लौटाएगा। एनसीएलटी ने इस काम के लिए फाइनेंशियल क्रेडिटर की पेशकश पर अश्वनी कुमार सिंगला को इनसोल्वेंसी रीसोल्यूशन प्रोसेस (आईआरपी) नियुक्त किया गया है।
डीएलएफ फेज-4 के रहने वाले विभुति भूषण विस्वास सहित 125 अन्य की ओर से एनसीएलटी में याचिका दायर की थी। इस मामले में ट्रिब्यूनल के सदस्य बाछू वेंकट बलराम दास और एलएम गुप्ता ने सुनवाई की। वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता केके सिंह और निधि रानी ने पैरवी की। जबकि प्रतिवादी पक्ष की ओर से नीहा नागपाल ने अदालत में पक्ष रखा।
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प्रोजेक्ट में जिन निवेशकों ने पैसा लगाया था उनसे 2017 में उनके घर देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन मार्च 2021 तक किसी को भी घर नहीं मिला। प्रोजेक्ट अभी भी अधूरा ही पड़ा हुआ है। यह भी कहा गया कि निवेशकों ने जो पैसा बिल्डर को दिया था वह मोटी रकम उसने अपने सम्यक प्रोजेक्ट में लगा दी।
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बिल्डर की ओर से दलील दी गई कि कोविड-19 की वजह से प्रोजेक्ट में देरी हुई है। प्राधिकरण की ओर से आईआरपी नियुक्त किए गए अश्वनी सिंगला कहते हैं कि अब इस प्रकरण में रीसोल्यूशन के लिए प्रोजेक्ट किसी अन्य बिल्डर को सौंप कर पूरा करने के लिए कहा जा सकता है। अगर यह नहीं हो सका तो बिल्डर की संपत्तियां बेचकर निवेशकों का पैसा वापस किया जा सकता है। इस बीच बिल्डर के पास जो भी फैसला होगा, उसकी अपील करने का अधिकार होगा।
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