आसां नहीं खुशियों की होम डिलीवरी
- डिलेवरी ब्वाॅय और गर्ल की राह में हैं कई रोड़े, समय की पाबंदी बढ़ा रही हादसों का खतरा
- प्रति डिलवरी सिर्फ 10 से 20 रुपये की ही होती है आमदनी, खराब रेटिंग पर कटता है महनताना
प्रगति मिश्रा
नोएडा। करीब एक सप्ताह पहले जब हम होली की खुशियों में सराबोर थे, सलारपुर निवासी 22 वर्षीय दीपक यादव के घर अचानक मातम मन गया। क्योंकि त्योहार के दिन भी खुशियों की होम डिलीवरी करने घर से निकला बिग बास्केट का कर्मचारी दीपक सड़क हादसे का शिकार हो चुका था। अपनी बीमार मां व किसान पिता का सहारा बनने के लिए उसने जो काम चुना था वही उसका काल बन गया। शहर मेें दीपक जैसे हजारों डिलीवरी ब्वाय और गर्ल हैं, जो हर दिन कई तकलीफें झेलते हुए हमारी जरूरत के सामानों तक हम तक पहुंचाते हैं, और इसके बदले उन्हें मिलता ही क्या है, बस प्रति डिलेवरी 10 से 20 रुपये।
होली-दिवाली जैसे त्योहारों पर भी छुट्टी न मनाते हुए लोगों की जरूरतें पूरी करते डिलीवरी ब्वाॅय या गर्ल को अक्सर देखा होगा। यह आमदनी का जरिया होने के चलते इनकी मजबूरी भी है। ये दिनभर गलियों की खाक छानते हुए आपकी जरूरतें पूरी करते हैं। कई बड़ी कंपनियों ने शहर में डिलीवरी के लिए हजारों कर्मी पार्ट टाइम नियुक्त किए हुए हैं, जिन्हें डिलीवरी संख्या के आधार पर ही पैसा मिलता है। अमूमन इनके लिए एक से दो किमी का क्षेत्र निर्धारित होता है। ग्राहकों की अच्छी रेटिंग जहां इन्हें मिलने वाली डिलीवरी संख्या में बढ़ोत्तरी करती हैं। वहीं ग्राहक द्वारा शिकायत, देरी से पहुंचने आदि कारणों से कई बार इनके महनताना में कटौती भी की जाती है। ऐसे में ये न तो मौसम की मार की परवाह करते हैं और न ही रास्तों की दुश्वारियां उनकी राह रोक पाती हैं।
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सोसाइटी के नियम भी बन जाते हैं मुसीबत:
एमेजॉन में कार्यरत बिजेंद्र बताते हैं कि उन्हें एक डिलीवरी का 12-13 रुपया मिलता है। एक दिन में 100 से 110 डिलीवरी करना उनका लक्ष्य है ताकी वह अपने घर का खर्च आसानी से पूरा कर सकें। दिन में मिले ऑर्डर तो आसानी से डिलेवर हो जाते हैं लेकिन, समस्या तब आती हैं जब आप नए हो और रात के आर्डर मिलें। सेक्टरों, सोसाइटियों के अपने अपने नियम होते हैं। गेट बंद होने के अलग अलग टाइम होते हैं जिसके चक्कर में कई बार हम पूर कोशिश के बाद भी लेट हो जाते हैं। कई लोग यह परेशानी समझते हैं तो कुछ लोग नाराज होकर रेटिंग खराब कर देते हैं जिसका खामियाजा हमें उठाना पड़ता है।
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पालतु जानवरों से रहते हैं सावधान:
डिलीवरी पर्सन के लिए पालतु जानवरों से बचना भी एक बड़ी समस्या है। हाल ही में हैदराबाद में पालतु कुत्ते के डर से बिल्डिंग से कूदे एक डिलीवरी ब्वाय की मौत का मामला सामने आया था। शहर में पशु प्रेमियों की बड़ी संख्या है लेकिन, पालतु जानवरों को लेकर लापरवाह रवैया कई बार डिलीवरी ब्वाय और गर्ल के लिए परेशानी का सबब बनता है। स्विगी में कार्यरत जुधिर बताते हैं कि जिन घरों में पालतू कुत्ते होते हैं वहां जाते वक्त थोड़ा सावधान रहना जरूरी होता है। वहीं डिलीवरी लेने वाले लोग थोड़ी समझदारी दिखाते हैं तो हमारे लिए और आसानी हो जाती है।