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Noida News: छह-सात को होलिका दहन, भद्रा के चलते संशय

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छह-सात को होलिका दहन, भद्रा के चलते संशय
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सोमवार से होलाष्टक लगने के कारण रुके रहेंगे मांगलिक कार्य
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। भद्रा के चलते होलिका दहन की तिथि को लेकर संशय बना हुआ है। कई स्थानों पर छह फरवरी तो कहीं सात फरवरी को होलिका दहन किया जाएगा। वहीं सोमवार से होलाष्टक की शुरुआत होने के कारण मांगलिक कार्य नहीं होंगे। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को होली का त्योहार मनाया जाता है, जो इस बार आठ मार्च को मनाई जा रही है।
होली से आठ दिन पहले होलाष्टक लग जाता है। इस बार होलाष्टक 27 फरवरी 2023 से सात मार्च तक है। इस दौरान सभी शुभ काम वर्जित रहेंगे। इस साल होलिका दहन की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सामान्यता रंगों वाली होली के एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। लेकिन सात मार्च को भद्रा नक्षत्र होने से तिथि को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ज्योतिष महर्षि पंडित प्रकाश जोशी के अनुसार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त सात मार्च, को शाम छह बजकर 24 मिनट से आठ बजकर 51 मिनट तक है। छह मार्च को शाम 4:28 से भद्रा का आरम्भ है जो
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सात मार्च सुबह 05 :14 तक रहेगी । शास्त्रों के अनुसार भद्रा में पर्व नही मनाया जाता है। लेकिन भद्रा का असर पूर्वी-उत्तर राज्यों में ही है यानी
दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, राजस्थान में छह मार्च को होलिका दहन होगा। वहीं बंगाल, उत्तरप्रदेश, बिहार, नेपाल में भद्रा का असर होगा इसलिए सात मार्च मंगलवार को होलिका दहन किया जाएगा। अगले दिन आठ मार्च को रंग वाली होली मनाई जा सकती है। वहीं पंडित वीरेंद्र नंदा कहते हैं कि भद्रा नक्षत्र में त्योहार मनाने की मनाही रहती है। इसलिए अपने शहर में भद्रा का विचार कर उसके अनुसार ही होलिका दहन का समय निर्धारित करना चाहिए।
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क्या है होलिका दहन की प्रक्रिया
होलिका दहन में किसी पेड़ की शाखा को जमीन में गाड़कर उसे चारों तरफ से लकड़ी, कंडे या उपले से ढक दिया जाता है। इन सारी चीजों को शुभ मुहूर्त में जलाया जाता है। इसमें छेद वाले गोबर के उपले, गेंहू की नई बालियां और उबटन डाले जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे साल भर व्यक्ति को आरोग्य की प्राप्ति होती है और सारी बुरी बलाएं इस अग्नि में भस्म हो जाती हैं। होलिका दहन के बाद लकड़ी की राख को घर में लाकर उससे तिलक करने की परंपरा भी है। होलिका दहन को कई जगह छोटी होली भी कहते हैं।
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