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Noida News: ...बिकती रही हिंडन, बसते गए लोग, जिम्मेदार आंख मूंदे रहे

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...बिकती रही हिंडन, बसते गए लोग, जिम्मेदार आंख मूंदे रहे
-हिंडन के किनारे पर बने मकानों की कीमत 18 से 20 हजार रुपये प्रति वर्ग गज
-आज भी सक्रिय हैं माफिया, बाढ़ ने विकराल रूप लिया तो मुश्किल हो जाएगा हालात
नवीन कुमार
ग्रेटर नोएडा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भू-माफिया ने सरकारी जमीन तो बेची ही साथ ही हिंडन नदी की जमीन को भी नहीं छोड़ा। 5 से 8 हजार रुपये प्रति वर्ग गज की दर पर छोटे-छोटे प्लॉट काटकर बेच डाला। यह सिलसिला अभी भी जारी है, लेकिन जिम्मेदार आंख बंद कर बैठे हैं। अब इसका खामियाजा गरीब लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
रविवार को हिंडन ने रौद्र रूप दिखाया तो सब तबाह होने की कगार पर पहुंच गया। अगर हिंडन ने थोड़ा और विकराल रूप धारण किया तो हालात संभालना मुश्किल हो जाएगा। जन हानि के साथ-साथ लाखों लोग बेघर हो जाएंगे। जबकि आरोपी माफिया आज भी पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के साथ साठगांठ किए बैठे हैं।
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रविवार को हिंडन की बाढ़ से पांच गांवों के हजारों घरों में पानी घुस गया। निवासी सुरेश ने बताया कि उन्होंने दस वर्ष पहले 8 हजार रुपये प्रति गज की दर से 100 वर्गगज मकान खरीदा था। हिंडन के किनारे मकान खरीदना उनकी मजबूरी थी। क्योंकि गरीबों के लिए नोएडा में सस्ते निवास की कोई व्यवस्था नहीं है। हिंडन में बाढ़ का कभी डर नहीं बताया गया था। पहली बार हिंडन में इतना पानी देखा है। अब पानी उतरने का इंतजार है। उसके बाद फिर से मकान में पहुंच जाएंगे। वहीं, महेंद्र का कहना है कि छिजारसी, चोटपुर समेत अन्य गांव के डूब क्षेत्र में सबसे सस्ता मकान हिंडन किनारे वाला है, लेकिन उसकी कीमत भी 18 से 20 हजार रुपये प्रति वर्गगज है। अब वहां पर गरीब लोगों के लिए मकान लेना मुश्किल है। लोग अभी भी मकान खरीद रहे हैं, लेकिन भूमाफिया को रोकने वाला कोई नहीं है। वह गरीब जनता को ठग रहे हैं।
3 से 5 हजार रुपये है एक कमरे का किराया

हिंडन के डूब क्षेत्र में हजारों मकान बने हैं। जहां ज्यादातर लोग किराए पर रहते हैं। यहां एक कमरे का किराया तीन से पांच हजार रुपये है। जबकि कमरों की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। गलियों में पानी निकासी और सड़क तक नहीं है। घरों का गंदा पानी हिंडन में जाता है।
रोक के बावजूद भी हो रही है रजिस्ट्री
नोएडा के छिजारसी से लेकर चोटपुर, हैबतपुर, युसुफपुर चकशाहबेरी, बहलोलपुर, सोरखा, बिसरख, जलपुरा, कुलेसरा, अलीवर्दीपुर, हल्दौनी, सुथ्याना, लखनावली, बेगमपुर तक भू माफिया सक्रिय हैं। पिछले 20 वर्ष से इन गांवों में हिंडन के डूब क्षेत्र में अवैध कॉलोनी काटी जा रही है। काफी जगह हिंडन नदी के किनारे को भी बेच दिया गया है। अक्तूबर, 2020 से रजिस्ट्री पर रोक है, लेकिन उसके बावजूद भी भूमाफिया रजिस्ट्री करवा रहे हैं। प्रशासन इन सबसे अनजान बना हुआ है।
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बैक मार सकती है हिंडन और नाले, होगी परेशानी
यमुना का जल स्तर भी खतरे के निशान के पास पहुंच गया है। वहीं हिंडन में भी बाढ़ आई हुई है। ऐसे में हिंडन और उससे जुड़े नाले बैक मार सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो हालात को संभालना मुश्किल हो जाएगा। हिंडन नदी के किनारे रहने वाले लाखों लोग बेघर हो जाएंगे। साथ ही शहर में भी बाढ़ का पानी घुसने का खतरा बढ़ जाएगा।
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