बुजुर्गों के लिए हेल्पलाइन 20 साल से अधर में, कमिश्नरेट में भी नहीं हुआ जारी
- पब्लिक गूगल शीट से तैयार हो रहा बुजुर्गों का डेटाबेस भी नहीं हुआ अब तक पूरा
सुशांत समदर्शी
नोएडा। हाईटेक सिटी में एकाकी में रहने वाले करीब डेढ़ लाख से अधिक बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए सीनियर सिटीजन हेल्पलाइन 20 वर्षों से अधर में लटका है। कमिश्नरेट बनने के बाद भी बुजुर्गों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी नहीं हुआ। वहीं बुजुर्गों के लिए पब्लिक गूगल शीट से तैयार हो रहा डेटाबेस भी अब तक पूरा नहीं हुआ है। ग्रेटर नोएडा में सोमवार को ही 70 वर्षीया बुजुर्ग महिला का करीब बीस दिन पुराना शव मिला है। नोएडा-ग्रेनो में इस तरह के कई मामले सामने आए हैं। हालांकि कमिश्नरेट के अधिकारियों का कहना है कि बुजुर्गों का डेटाबेस फिर से तैयार करने की योजना है।
नोएडा व ग्रेटर नोएडा में डेढ़ लाख से अधिक बुजुर्ग सरकारी व प्राइवेट फ्लैट में एकाकी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। शहर में एयरफोर्स, नेवी, आर्मी से जुड़े सेक्टर 15ए, 21, 25, 28, 29, 37 व 82 है। इसके अलावा सेक्टर-44, 47, 48, 49, 50 51, 61, 62 स्थित केंद्रीय विहार, रेल विहार व अन्य सोसाइटी में केंद्र व राज्य से रिटायर्ड अधिकारियों ने अपने आशियाने बनाए हैं। इसके अलावा हाईराइज सोसायटियों में भी बुजुर्ग रहते हैं। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मिलने के कारण पूर्व मुख्य न्यायाधीश से लेकर एक हजार से अधिक रिटायर्ड आईएएस, आईपीएस व अन्य उच्च अधिकारी रह रहे हैं। कुछ बुजुर्गों को छोड़ दें तो अधिकतर लोग एकाकी जीवन जीने को मजबूर हैं। ऐसे में बुजुर्गों की मदद के लिए वर्ष 2004 से हेल्पलाइन जारी करने की कवायद हुई थी लेकिन बीस वर्ष के बाद भी अब तक यह मूर्त रूप नहीं ले पाया है।
2004 से अटका है हेल्पलाइन का मामला
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में बुजुर्गों के लिए हेल्पलाइन बनाने का मामला वर्ष 2004 से अटका हुआ है। अब तक कई बैठकें हो चुकी है लेकिन कोई हल नहींं निकला। 2004 में नोएडा सिटीजन फोरम ने सीनियर सिटीजन की सुरक्षा के लिए एक टास्क फोर्स बनाया था। इस टास्क फोर्स ने तीन सप्ताह में एक्शन प्लान तैयार कर पुलिस को सौंप दिया था। टास्क फोर्स की पहली बैठक 7 सितंबर 2004 को हुई थी। इस टास्क फोर्स का नोडल अफसर एसएसपी व डीएम और कोऑर्डिनेटर एसपी सिटी को बनाया गया था। सितंबर 2004 को दूसरी बैठक हुई। दिल्ली पुलिस के सीनियर सिटीजन सेल के लिए काम कर रही एक संस्था के लोग भी इस टास्क फोर्स में शामिल थे। उन्होंने प्रजेंटेशन भी पुलिस के सामने दिया था। इस मुद्दे पर कार्रवाई के लिए अंतिम पत्र 25 जुलाई 2005 को जिलाधिकारी को भेजा गया। जिलाधिकारी ने मार्च 2006 में यह पत्र कार्रवाई के लिए एसएसपी के पास भेजा। इसके बाद कई बार बैठक हो चुकी हैं मगर फाइल इधर से उधर ही घूम रही है।
बुजुर्गों की मांग
- सीनियर सिटीजन की हेल्पलाइन
- प्रत्येक सीनियर सिटीजन का रजिस्ट्रेशन
- पुलिस का आरडब्ल्यूए के साथ जाकर रेगुलर विजिट
- आवासीय कॉलोनी में गैर कानूनी रूप से दुकान चलाने वालों का सत्यापन
- सेक्टर-कॉलोनी में जाने वाले दैनिक कर्मियों जैसे बिजली,टेलीफोन व डाकिया आदि का सत्यापन।
- आरडब्ल्यूए के कर्मी,सफाई वाले, प्लंबर, बिजली और धोबी, नौकर,ड्राईवर, माली का सत्यापन।
- एसी मैकेनिक, केबल ऑपरेटर, इंटरनेट चलाने वाले,वेंडर, कबाड़ी, हॉकर व सेल्समैन का सत्यापन।
बुजुर्गों की सुरक्षा कमिश्नरेट पुलिस की प्राथमिकता है। इसके लिए पहले बुजुर्गों का डेटाबेस तैयार करने की प्रक्रिया फिर से शुरू की जाएगी। इसके बाद आरडब्ल्यूए के सहयोग से स्थानीय पुलिस बुजुर्गों की मदद करेंगे और उनका लगातार हाल-चाल लेंगे। -अनिल कुमार यादव, डीसीपी