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गुरु मंत्र : मूल्यपरक शिक्षा और नवाचार आधारित शिक्षण से बनते हैं उत्कृष्ट विद्यार्थी

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नीरज अवस्थी प्रधानाचार्य मॉडर्न स्कूल।
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आज के दौर में शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को परीक्षा में अच्छे अंक दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें ज्ञानवान, संवेदनशील, नैतिक, अनुशासित और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षण व्यवस्था अब रटने की बजाय आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता, समस्या-समाधान, नेतृत्व क्षमता और जीवन मूल्यों के विकास पर जोर दे रही है। इस बदलाव को सफल बनाने में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। एक प्रभावी शिक्षक वही होता है जो विषय को केवल पाठ्यपुस्तक तक सीमित न रखकर उसे विद्यार्थियों के जीवन और अनुभवों से जोड़कर पढ़ाए। गतिविधि आधारित शिक्षण, अनुभवात्मक अधिगम, परियोजना आधारित अध्ययन, प्रश्नोन्मुख पद्धति, सहयोगात्मक शिक्षण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित संसाधनों, स्मार्ट कक्षाओं और डिजिटल तकनीकों का प्रभावी उपयोग विद्यार्थियों में सीखने की जिज्ञासा बढ़ाता है और शिक्षा को अधिक रोचक बनाता है। हर विद्यार्थी अपने भीतर असीम संभावनाएं लेकर आता है। शिक्षक का दायित्व केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन प्रतिभाओं को पहचानकर सही दिशा देना भी है। प्रेम, धैर्य, निरंतर प्रोत्साहन और सकारात्मक दृष्टिकोण ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षण की पहचान हैं। जो शिक्षक स्वयं सीखना और समय के साथ खुद को विकसित करना नहीं छोड़ता, वही अपने विद्यार्थियों में आजीवन सीखते रहने की प्रेरणा जगा सकता है।
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– डॉ. नीरज अवस्थी, प्रधानाचार्य, मॉडर्न स्कूल, नोएडा

नीरज अवस्थी प्रधानाचार्य मॉडर्न स्कूल।

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