गुरु मंत्र प्राथमिक वर्ष बच्चों के विकास की बुनियाद-- दीपाली शर्मा, सहायक टीचर, प्राथमिक वि
बच्चे का भविष्य उसकी प्राथमिक शिक्षा के वर्षों में ही आकार लेना शुरू कर देता है। यही वह समय होता है, जब उसमें नैतिक मूल्यों, अनुशासन, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित की जा सकती है। इसलिए शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक दिलाना नहीं, बल्कि बेहतर इंसान तैयार करना भी होना चाहिए। बच्चों को प्रकृति, कला और पर्यावरण से जोड़कर सीखने का अवसर देना चाहिए। इससे उनकी रचनात्मक सोच विकसित होती है और सीखने में रुचि बढ़ती है। खेलकूद, योग और गतिविधि आधारित शिक्षण उनके मानसिक व शारीरिक विकास को मजबूत बनाते हैं। साथ ही संचार कौशल, भावनात्मक संतुलन और टीम भावना भी विकसित होती है। आज के डिजिटल दौर में बच्चों को केवल ऑनलाइन दुनिया तक सीमित नहीं रखना चाहिए। परिवार, विद्यालय और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी है कि बच्चों को वास्तविक अनुभवों, संवाद और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ें। यही प्रयास उन्हें आत्मविश्वासी, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ाएगा। प्राथमिक शिक्षा की मजबूत नींव ही उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी कुंजी है।
- दीपाली शर्मा, सहायक अध्यापिका, प्राथमिक विद्यालय चपरगढ़, यमुना सिटी