शिक्षक केवल पाठ्य पुस्तकों का ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने वाला मार्गदर्शक और प्रेरणा का स्रोत होता है। कक्षा में आने वाला प्रत्येक बच्चा अपनी अलग प्रतिभा, क्षमता और सपनों के साथ आता है। किसी की रुचि विज्ञान में होती है, तो किसी की कला, साहित्य या खेल में। एक सच्चे शिक्षक की जिम्मेदारी होती है कि वह बच्चों की छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा प्रदान करे। शिक्षक एक शिल्पकार की तरह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और भविष्य को आकार देता है। वह बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और मेहनत की भावना विकसित करता है, जिससे वे समाज के लिए जिम्मेदार और सफल नागरिक बन सकें। वर्तमान समय में शिक्षकों को भी लगातार सीखते रहना चाहिए। नई शिक्षा नीति के अनुरूप आधुनिक शिक्षण तकनीकों और नवाचारों को अपनाकर हर विद्यार्थी की सीखने की क्षमता के अनुसार पढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। इससे शिक्षा अधिक प्रभावी और रोचक बनती है।
- शिव दत्त सिंह, महर्षि विद्या मंदिर, महर्षि नगर, नोएडा