सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए अंग्रेजी अक्सर कठिन विषय होती है। इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए मैं पिछले छह वर्षों से कक्षा दो से पांच तक के विद्यार्थियों को ध्वनियों (फोनेटिक्स) के आधार पर अंग्रेजी सिखा रही हूं। शुरुआत में बच्चे वॉवेल और कॉन्सोनेंट पहचान लेते थे, लेकिन सही उच्चारण और पढ़ने में झिझकते थे। इसे दूर करने के लिए मैंने ऑडियो रिकॉर्डिंग तकनीक अपनाई। बच्चों की आवाज रिकॉर्ड कर उन्हें दोबारा सुनाया जाता है, जिससे वे अपनी गलतियां पहचानते हैं और सही उच्चारण सीखते हैं। इससे उनकी पढ़ने और बोलने की क्षमता में सुधार हुआ है। पिछले एक वर्ष से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को भी शिक्षण का हिस्सा बनाया है। एआई आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चे खेल-खेल में अंग्रेजी पढ़ना, लिखना और बोलना सीख रहे हैं। नई तकनीकों ने उनकी रुचि, आत्मविश्वास और सीखने की गति बढ़ाई है। मेरा विश्वास है कि नवाचार और तकनीक के प्रभावी उपयोग से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी भी किसी से पीछे नहीं रहेंगे।
- रश्मि शील, अंग्रेजी शिक्षिका, कंपोजिट विद्यालय पर्थला खंजरपुर, नोएडा