शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान या परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन के लिए तैयार करना है। एक शिक्षक के रूप में मेरा मानना है कि सीखना तभी सार्थक होता है, जब विद्यार्थी उसे व्यवहार में उतार सकें। इसलिए कक्षा 9 से 12 तक सामाजिक विज्ञान और भूगोल पढ़ाते समय मैं गतिविधि-आधारित शिक्षण, मानचित्र निर्माण, प्रोजेक्ट, समूह कार्य और डिजिटल संसाधनों का अधिक उपयोग करता हूं। इससे विद्यार्थी विषय को रटने के बजाय समझते हैं और उनकी जिज्ञासा भी बढ़ती है। भूगोल जैसे विषय को अनुभव के साथ पढ़ाया जाए तो वह अधिक रोचक और यादगार बन जाता है। विद्यार्थी जब स्वयं मानचित्र बनाते हैं, आंकड़ों का विश्लेषण करते हैं और भौगोलिक घटनाओं को समझते हैं, तो उनमें तार्किक सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित होती है। आज शिक्षक की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं है। उसे विद्यार्थियों का मार्गदर्शक और प्रेरक बनना होगा, ताकि वे आत्मविश्वास, सही सोच और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता के साथ आगे बढ़ सकें।
- दीपेश यास्क, शिक्षक, भाऊराव देवरस सरस्वती विद्या मंदिर, नोएडा
दीपेश यास्क