शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा देना भी है। प्रत्येक बच्चे की रुचि और क्षमता अलग होती है। कोई छात्र विज्ञान में बेहतर होता है तो कोई कला, खेल, लेखन, वाचन या अन्य रचनात्मक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकता है। ऐसे में शिक्षकों को पढ़ाई के साथ बच्चों से नियमित संवाद स्थापित करना चाहिए, ताकि उनकी रुचियों और विशेषताओं को समझा जा सके। यदि किसी छात्र की रुचि वाले क्षेत्र में उसे प्रोत्साहन और मार्गदर्शन मिले तो वह उस क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर सकता है। हर बच्चे के भीतर कोई न कोई विशेष गुण छिपा होता है। किसी की अभिव्यक्ति क्षमता उत्कृष्ट होती है तो कोई अपनी रचनात्मक सोच से अलग पहचान बना सकता है। शिक्षकों और अभिभावकों का दायित्व है कि वे बच्चों की क्षमताओं को पहचानें और उन्हें निखारने का अवसर दें। इससे विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे अपने लक्ष्य को लेकर अधिक स्पष्ट एवं मजबूत बन सकेंगे।
- डॉ. ऋतु सिंह, उप प्रधानाचार्य, राजकीय इंटर कॉलेज, सेक्टर-12