जागेश्वर,सहायक अध्यापक,उच्च प्राथमिक विद्यालय, उस्मानपुर
तकनीकी युग में विद्यार्थी मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया में अधिक समय बिता रहे हैं, जिससे उनका जुड़ाव गीत-संगीत और खेलकूद जैसी गतिविधियों से कम होता जा रहा है। ऐसे में शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को खेल और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना बेहद जरूरी है। विद्यालयों में समय-समय पर प्रतियोगिताएं आयोजित कर बच्चों के सर्वांगीण विकास का प्रयास किया जाता है। मेरे विद्यालय में करीब 500 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए नियमित रूप से विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जाता है। विद्यालय की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकारी बजट के साथ एनजीओ और समाजसेवी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जा रहा है। इससे स्मार्ट क्लास, इंटरनेट, फर्नीचर और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विकास हुआ है। विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित न रखकर प्रैक्टिकल गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाना चाहिए। इससे बच्चे विषयों को बेहतर तरीके से समझते हैं और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
- जागेश्वर, सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय, उस्मानपुर