हर बच्चे में सीखने और आगे बढ़ने की अनूठी क्षमता होती है। एक शिक्षक का सबसे बड़ा दायित्व उस क्षमता को पहचानकर उसे सही दिशा देना है। अपने 20 वर्षों के शिक्षण अनुभव में मैंने महसूस किया है कि यदि बच्चों को उनकी समझ और रुचि के अनुसार पढ़ाया जाए तो वे कठिन से कठिन विषय भी आसानी से सीख लेते हैं। गणित की शिक्षिका होने के नाते मैं पाठ्यक्रम को दैनिक जीवन की परिस्थितियों से जोड़कर पढ़ाने का प्रयास करती हूं। गणित किट, चार्ट, मॉडल, प्रोजेक्ट और खेल आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के लिए सीखना सरल और रोचक बन जाता है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे समस्याओं का समाधान स्वयं करना सीखते हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाना नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व, तार्किक सोच और जीवन कौशल का विकास करना भी है। सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे सीमित संसाधनों वाले परिवारों से आते हैं, लेकिन उनकी प्रतिभा किसी से कम नहीं होती। यदि उन्हें उचित अवसर, प्रेरणा और सकारात्मक वातावरण मिले तो वे हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। हमारा प्रयास होना चाहिए कि प्रत्येक विद्यार्थी की विशेष क्षमता का विकास हो, ताकि वह एक जागरूक, आत्मनिर्भर और आदर्श नागरिक बनकर समाज और देश के विकास में अपना योगदान दे सके।
- मीनाक्षी सेंगर, शिक्षिका, कंपोजिट विद्यालय मोरना, नोएडा