फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गुरुमंत्र : शिक्षा को जीवन जीने की कला के रूप में अपनाएं

विज्ञापन
शिक्षिका---समीक्षा सिंह कंपोजिट विद्यालय घोड़ी बछेड़ा दादरी
विज्ञापन
जीवन संघर्ष, चुनौतियों और नई संभावनाओं का संगम है। ऐसे में विद्यार्थियों को कठिन परिस्थितियों से घबराने के बजाय धैर्य, विवेक, दृढ़ निश्चय और सकारात्मक सोच के साथ उनका सामना करना चाहिए। आत्मविश्वास, अनुशासन और निरंतर प्रयास ही सफलता की मजबूत नींव रखते हैं। प्रत्येक छात्र को अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखते हुए ईश्वर में आस्था बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि यही विश्वास उन्हें हर चुनौती से उबरने की शक्ति देता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं है, बल्कि उसे जीवन जीने की कला के रूप में अपनाना चाहिए। विद्यालय में अर्जित ज्ञान का उपयोग दैनिक जीवन, समस्याओं के समाधान और समाज के हित में करना ही वास्तविक शिक्षा है। विद्यार्थी यदि सीखने को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखकर व्यवहार में उतारेंगे, तो वे जिम्मेदार, संवेदनशील और जागरूक नागरिक बन सकेंगे।
विज्ञापन

- समीक्षा सिंह, शिक्षिका, कंपोजिट विद्यालय घोड़ी बछेड़ा
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें