फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Noida News: 21 साल में ग्रेनो प्राधिकरण की 20 लाख वर्गमीटर जमीन पर कब्जा

विज्ञापन
विज्ञापन
21 साल में ग्रेनो प्राधिकरण की 20 लाख वर्गमीटर जमीन पर कब्जा
विज्ञापन




बिसरख समेत पांच गांवों में काॅलोनाइजर का रहा है बोलबाला, भूमाफिया ने बेची प्राधिकरण की जमीन

ग्रेनो प्राधिकरण के अधिकारियों ने एक माह में 880 करोड़ रुपये की 4.37 लाख वर्गमीटर भूमि वापस ली

मनोज कुमार
ग्रेटर नोएडा। प्राधिकरण की अधिगृहीत 20 लाख वर्गमीटर जमीन पर 21 साल में भूमाफिया और काॅलोनाइजर ने कब्जा कर 3500 करोड़ रुपये में बेच दिया। ग्रेनो प्राधिकरण का अब तक यह सबसे बड़ा घोटाला है, मगर जिम्मेदार अधिकारियों ने सुध नहीं और नतीजा यह हुआ कि जिन किसानों को तत्काल सुविधाएं दी जानी थीं, वह आज तक आंदोलन करने को मजबूर हैं। वहीं, भूमाफिया और काॅलोनाइजर के अलावा तत्कालीन अधिकारियों ने मोटी रकम कमाई और भाग गए। हालांकि एक माह में प्राधिकरण के अधिकारियों 880 करोड़ रुपये की 4.37 लाख जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया है।


प्राधिकरण की स्थापना 1991 में हुई थी और करीब एक दशक तक तो प्राधिकरण अधिकारियों ने जमकर काम किया। जमीन अधिग्रहण करते हुए कब्जा लेते और परियोजनाओं को लांच कर दिया जाता था। मगर साल 2003 के बाद से प्राधिकरण बिल्डर परियोजनाओं के फेर में आ गया। अब प्राधिकरण अधिकारियों ने बिल्डरों कोे उनकी मन माफिक जमीन अधिग्रहण करके देने लगे और उसके आसपास की भूमि पर ध्यान देना बंद कर दिया। इसी का लाभ उठाते हुए भूमाफिया और काॅलोनाइजर सक्रिय हो गए।
विज्ञापन

जब भी अधिकारियों की नजर इस तरह की जमीन पर पड़ती तो यह नजराना पहुंचा देते और अधिकारियों-कर्मचारियों की निरीक्षण टल जाता। इस तरह प्राधिकरण की लाखों वर्गमीटर जमीन पर भूमाफिया और काॅलोनाइजर का कब्जा होता गया और वह उसे प्लॉट और विला बनाकर बेचते रहे, जबकि गांवों के पास जमीन पर कब्जा होने के कारण प्राधिकरण के पास किसानों को छह और चार फीसदी आबादी भूखंड देने के लिए भूमि नहीं बची। इससे किसानों की समस्याएं बढ़ती चली गईं और उनको आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ा।


-

किसानों की छह फीसदी आबादी भूखंडों के लिए गांव-गांव में शिविर लगाकर पात्रता तय की जा रही है। ग्रेनो वेस्ट के बिसरख, तुस्याना, सैनी, सुनपुरा, पतवड़ी, खैरपुर,चौगानपुर और छपरौला में प्राधिकरण की जमीन पर कब्जा है। उसे जल्द ही इसे मुक्त किया जाएगा। - हिमांशु वर्मा, ओएसडी प्रोजेक्ट
विज्ञापन




-

4.37 लाख वर्गमीटर जमीन वापस ली


- पांच मार्च को बिसरख के खसरा नंबर 676, 698 और 699 में 40 करोड़ की 20 हजार वर्गमीटर जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया।

- पांच मार्च को खेड़ा चौगानपुर के खसरा नंबर 225 और 229 में 80 करोड़ की 40 हजार वर्गमीटर जमीन को खाली कराया।

- नौ मार्च को बिसरख हिंडन डूब क्षेत्र में खसरा नंबर 1, 2 व 3 पर 220 करोड़ रुपये की 1.10 लाख वर्गमीटर जमीन से अतिक्रमण हटाया।

- नौ मार्च तुस्याना में खसरा नंबर 987, 988 और 989 से 100 करोड़ की 50 हजार वर्गमीटर भूमि से अवैध निर्माण ढहाया गया।

- 27 फरवरी को बिसरख के खसरा नंबर 773 पर 40 करोड़ रुपये की 20 हजार वर्गमीटर जमीन खाली कराई गई।
- 14 फरवरी को बिसरख के पास हिंडन डूब क्षेत्र में चलाया बुल्डोजर चलाकर 80 करोड़ रुपये की 40 हजार वर्गमीटर कब्जा मुक्त कराई।
- 10 फरवरी को छपरौला में सहारा सिटी पर 250 करोड़ रुपये की सवा लाख वर्गमीटर जमीन से कब्जा हटवाया।
- नौ फरवरी को बिसरख में 30 करोड़ रुपये की 12 हजार वर्गमीटर जमीन पर अवैध कब्जा हटाया गया।

- आठ फरवरी ग्रेनो प्राधिकरण ने घंघोला में दो अवैध ईंट-भट्टे ढहाते हुए 40 करोड़ रुपये की 20 हजार वर्गमीटर कब्जा मुक्त कराया।



-

ग्रेनो प्राधिकरण में आए तो पता चला कि किसानों को आबादी भूखंड देने के लिए जमीन नहीं है। ऑडिट कराया तो पाया कि प्राधिकरण की जमीन पर भूमाफिया और काॅलोनाइजर ने कब्जा कर लिया है। अब तक 880 करोड़ रुपये की जमीन को कब्जा मुक्त कराया जा चुका है। अभी कई सौ करोड़ रुपये की जमीन पर कब्जा है, उसे भी जल्द कब्जे में लिया जाएगा। - रवि कुमार एनजी, सीईओ, ग्रेनो प्राधिकरण
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें