नोएडा प्राधिकरण के विधिक परामर्शदाता को शासन ने किया निलंबित
फर्जी तरीके से मुआवजा वितरण का मामला: हाल ही में फर्जी तरीके से मुआवजा वितरण के 11 अन्य मामलों में प्राधिकरण ने दर्ज कराई थी एफआईआर दर्ज
- करीब 82 करोड़ के मुआवजा वितरण के मामले में प्राधिकरण के तीन अधिकारियों समेत कइ रडार पर
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण में फर्जी तरीके से मुआवजा वितरण के मामले में विधिक परामर्शदाता दिनेश कुमार को शासन ने निलंबित कर दिया है। प्राधिकरण की ओर से 11 अन्य मामलों में दर्ज कराई एफआईआर के बाद यह कार्रवाई की है। इस मामले में एक अन्य अधिकारी पहले से निलंबित है। अब एफआईआर के बाद भू-मालिकों के साथ पुलिस और प्रशासन अधिकारी के रडार पर हैं।
दरअसल, 82 करोड़ रुपये के मुआवजा वितरण में गड़बड़झाले की बात सामने आने के बाद प्राधिकरण के विधि अधिकारी सुशील भाटी ने शासन के निर्देश पर 11 अन्य मामलों में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद शासन ने एक्शन लेते हुए दिनेश कुमार को निलंबित कर दिया। इस मामले में विधि विभाग के अधिकारी वीरेंद्र नागर को पहले से निलंबित किया गया था। उन्हें बर्खास्त करने की संस्तुति भी की गई है। एफआईआर में नामजद प्राधिकरण के तीसरे अधिकारी पहले ही रिटायर हो चुके हैं। एक मामले में पहले ही प्राधिकरण ने एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें भी प्राधिकरण के दो अधिकारियों को आरोपी बनाया गया था।
गेझा तिलपताबाद का है पूरा मामला
पूरा मामला गेझा तिलपताबाद में वर्ष 2015-16 में बांटे गए मुआवजे का है। इसमें प्राधिकरण के अधिकारियों पर 12 मामलों में भूमि मालिकों को गलत तरीके से मुआवजे का लाभ दिलाने का आरोप है। एफआईआर में प्राधिकरण के तीन अधिकारियों के अलावा भू मालिकों और उनके संबंधियों के नाम दर्ज हैं। पुलिस ने फर्जीवाड़े सहित अन्य धाराओं के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज किया है।
एसआईटी भी कर रही फर्जीवाड़े की जांच
शासन की ओर से गठित तीन सदस्यीय एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही है। बीते दिनों एसआईटी ने प्राधिकरण कार्यालय में आकर जांच किया और संबंधित दस्तावेज ले गए। अब इस आधार पर एसआईटी अपनी रिपोर्ट देगी, जो कि सुप्रीम कोर्ट में रखी जाएगी। इस आधार पर मुआवजा वितरण में फर्जीवाड़े की जांच किसी बड़ी एजेंसी को भी सौंपी जा सकती है।