बौद्धिक संपदा अधिकार की नीतियों से नवाचार को बढ़ावा दे रही सरकार: आर वेंकटरमणी
- शारदा स्कूल ऑफ लॉ में बौद्धिक संपदा अधिकारों में नवीन विचारों की संभावनाएं और चुनौतियों पर अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। नॉलेज पार्क स्थित शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ की ओर से बौद्धिक संपदा अधिकारों में नवीन विचारों की संभावनाएं और चुनौतियों पर अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। बुधवार को आयोजित एकदिवसीय कार्यक्रम में अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया आर वेंकटरमणी ने कॉपीराइट और लाइसेंस संपत्तियों पर विचार साझा किए। उन्होंने कंपनियों व व्यक्तियों के रचनात्मक कार्यों के अधिकारों की सुरक्षा में कॉपीराइट सुरक्षा के महत्व की जानकारी दी। अटॉर्नी जनरल ने बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) की नीतियों और कानून के माध्यम से नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ावा देने में सरकार की भूमिका पर भी चर्चा की।
इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश प्रतिभा एम सिंह, उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता विभा दत्ता मखीजा, विवि के प्रो-चांसलर वाईके गुप्ता और कुलपति सिबाराम खारा ने दीप जलाकर किया। न्यायाधीश प्रतिभा एम सिंह ने पेटेंट औद्योगिक डिजाइन ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, भौगोलिक संकेत, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आईपी कानून पंजीकरण की प्रक्रिया और पेटेंट कानून जैसे मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि कानून के क्षेत्र में अपना करियर कैसे बनाए।
वहीं उच्चतम न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता विभा दत्ता मखीजा ने कहा कि कानून के क्षेत्र में हमेशा नई चुनौतियों से रूबरू होना पड़ सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को हमेशा भविष्य के बारे सोचने की सलाह दी। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने बताया कि आईपीआर के क्षेत्र में कई समस्याएं आ रही हैं। जिसे समझ कर उसका हल निकालना होगा। उन्होंने कहा कि आप अच्छे वकील तभी बन सकते हैं जब मुवक्किल की समस्या को अपनी समझकर कार्य करें। इस अवसर पर विवि के प्रो चांसलर वाईके गुप्ता ने बताया कि कॉन्फ्रेंस के जरिये प्रतिभागियों को आईपीआर से जुड़ीं जानकारियां साझा करने में मदद मिलीं।