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Noida News: सरकारी स्कूल से मुंह मोड़ रही बेटियां

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सरकारी स्कूल से मुंह मोड़ रहीं बेटियां
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- 9 वीं के बाद हर साल सैकड़ों लड़कियां छोड़ दे रही स्कूल, 12 वीं तक पहुंचने में 2826 सीटें हो जा रही कम
- 10 वीं के बाद 12 वीं में यूपी बोर्ड से घर बैठकर पढ़ाई करने वाली लड़कियों का आंकड़ा बढ़ा

नेहा शर्मा
नोएडा। मैं पढ़ने में बहुत अच्छी नहीं हूं। ऊपर से 9 वीं क्लास में मुझे पीरियड्स हो गए। स्कूल में शौचालय साफ नहीं रहता। इसके कारण आए दिन संक्रमण हो जाता था। मम्मी ने बोला 12 वीं के बाद पापा तेरी शादी का विचार कर रहे हैं। वैसे भी तो तू पढ़ने में भी सामान्य है। इससे अच्छा है कि ओपन से पढ़ाई कर लो। इंफेक्शन की दिक्कत से भी निजात मिल जाएगी। लगातार यह बात सुनकर मैंने ओपन स्कूल में ही दाखिला ले लिया। जबकि मेरा भाई पढ़ने में मुझ से भी कमजोर है। वह आज भी स्कूल जाता है। यह किसी एक छात्रा की कहानी नहीं है बल्कि सैकड़ों ऐसी छात्राएं हैं, जो पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर हैं। यही वजह है हर साल 9 वीं से 12 वीं तक पहुंचने के दौरान बड़ी संख्या में लड़कियां पढ़ाई छोड़ रही हैं। 9 वीं से 12 वीं तक आते-आते दो से ढ़ाई हजार लड़कियों की सीटें कम हो जाती हैं। इसके कई कारण हैं।

जिले में 152 यूपी बोर्ड के स्कूल हैं। स्कूल की पढ़ाई छोड़ने वालों में सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियां हैं। वर्ष 2022-23 में 9 वीं कक्षा में 11322 लड़कियां और 12 वीं में 8496 लड़कियां पंजीकृत थीं। यानी 9 वीं से 12 वी तक 2826 सीटें कम हो गईं। इसके अलावा 2022 में 10 वीं में 15 लड़कियों ने यूपी बोर्ड से घर बैठकर पढ़ाई की, जबकि 12 वीं में आते-आते यह आंकड़ा 210 तक पहुंच गया।
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शौचालय भी बन रहे बड़ी वजह

एक शिक्षक ने बताया कि स्कूलों में शौचालय की बड़ी समस्या है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। शहरी क्षेत्रों में तो सरकारी स्कूल में निजी कंपनियां सीएसआर ( कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) के तहत स्कूलों में शौचालय और पानी की व्यवस्था बेहतर करने पर काम कर रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इन पर बहुत कम काम हो रहा है।
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2022-2023 में यूपी बोर्ड के स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियां
9 वीं - 11322
10 वीं - 10533
11 वीं - 8918
12 वीं- 8496

पिछले कुछ सालों में बोर्ड परीक्षा देने वाली लड़कियां
2022 2020 2019
10 वीं 9235 9306 9326
12 वीं 7557 8032 7193

अब छात्राएं कॅरिअर को लेकर जागरूक हो गई हैं। इसलिए वह हाईस्कूल से ही वोकेशन कोर्स करने को प्राथमिकता देती हैं, ताकि नौकरी मिलने में आसानी हो सके। इसलिए यह बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि स्कूल प्रबंधकों की ओर से बच्चों की काउंसलिंग भी की जाती है, ताकि वह बीच में पढ़ाई नहीं छोड़े।


डॉ धर्मवीर सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षण
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