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Shrikant Tyagi Case: जब-जब हिला गौतमबुद्ध नगर लखनऊ ने थामी कमान, जानिए कब-कब शातिरों ने पुलिस को छकाया

Wed, 10 Aug 2022 10:11 AM IST
प्रशांत कुमार जेपी शर्मा, ग्रेटर नोएडा।

सार

श्रीकांत त्यागी प्रकरण से देशभर में गौतमबुद्ध नगर सुर्खियों में आ गया। इस कारण लखनऊ में शासन स्तर पर न केवल दखल दिया गया, बल्कि निर्देश देकर कड़ी कार्रवाई कराई गई। इसी का नतीजा रहा है कि श्रीकांत कानून के शिकंजे में है। 
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श्रीकांत त्यागी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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श्रीकांत त्यागी प्रकरण पहला मामला नहीं जब जिले में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं और लखनऊ से शासन को दखल देना पड़ा हो। इससे पहले ग्रेनो वेस्ट में मैनेजर गौरव चंदेल की हत्या, शाहबेरी हादसे में नौ लोगों की मौत और भाजपा नेता शिवकुमार यादव समेत तीन लोगों की सरेराह ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या के बाद भी जिला पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे और लखनऊ को कमान संभालनी पड़ी। खास बात यह है कि ये तीनों मामले जिला कमिश्नरेट के सेंट्रल जोन क्षेत्र के हैं। 

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गौरव हत्याकांड के बाद रखी गई कमिश्नरेट की नींव 
ग्रेनो वेस्ट निवासी गौरव चंदेल की 6 जनवरी 2020 को गुरुग्राम स्थित दफ्तर से लौटने के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। ग्रेनो वेस्ट में रहने वाले अधिकांश लोग गौरव की ही तरह सुबह दफ्तर जाते हैं और शाम और रात तक वापस लौटते हैं। ऐसे में निवासियों में असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो गई थी। निवासी वारदात के खुलासे और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए सड़क से सोशल मीडिया पर मांग उठा रहे थे। जस्टिस फॉर गौरव चंदेल ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा था। इस कारण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वारदात के खुलासे व जिले में सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। इसके बाद ही कमिश्नरेट लागू किया गया था। 

भाजपा नेता समेत तीन लोगों की हत्या
17 नवंबर 2017 को ग्रेनो वेस्ट में तिगरी गोलचक्कर के पास बहलोलपुर निवासी भाजपा नेता शिवकुमार यादव की फॉरच्यूनर पर बाइक व अन्य वाहनों पर सवार होकर आए बदमाशों ने ताबड़तोड़ 30-40 गोलियां चलाईं थीं। इसमें शिवकुमार यादव, चालक व एक राह से गुजर रही छात्रा की मौत हो गई थी। सुंदर भाटी गिरोह के बदमाशों समेत 14 के नाम केस में सामने आए थे। यूपी पुलिस के एक दरोगा का भी केस में नाम आया था। वहीं, बिसरख थाना प्रभारी पर दरोगा से पहचान के आरोप लगे थे। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी के आदेश से इस मामले की जांच गाजियाबाद क्राइम ब्रांच से कराई गई थी।  

शाहबेरी में नेता, माफिया और अफसर पर गठजोड़ के थे आरोप  
शाहबेरी में 17 जुलाई 2018 को शाहबेरी में दो अवैध भवनों के मलबे में दबकर नौ लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद भूमाफिया, नेता व अफसरों के गठजोड़ से अवैध कॉलोनी बसने के आरोप लगे थे। मामले की गूंज देशभर में थी, तब भी मुख्यमंत्री योगी ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद एक के बाद एक केस दर्ज किए गए। गैंगस्टर लगाकर बिल्डरों की गिरफ्तारी की गई। 

स्थानीय पुलिस के गिरफ्तारी के नाम पर हाथ रहे खाली 
गौरव हत्याकांड में मिर्ची गैंग के सरगना आशु जाट, पत्नी पूनम व साथी उमेश के नाम सामने आए थे। उमेश व पूनम की गिरफ्तारी हापुड़ पुलिस ने की थी, जबकि आशु की भी मुंबई में गिरफ्तारी की गई। वहीं, शिवकुमार यादव के भाई योगेश ने बताया कि 14 में से एक भी आरोपी की गिरफ्तारी गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने नहीं की। एसटीएफ ने घटना का खुलासा किया।
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एसीपी पीपी सिंह ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
श्रीकांत की गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एसीपी पीपी सिंह ने गौरव चंदेल हत्याकांड के खुलासे में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि, एसीपी पीपी सिंह उस दौरान हापुड़ में सीओ थे। उन्होंने ही मिर्ची गैंग के सरगना की पत्नी पूूनम और आशु जाट के साथी उमेश को गिरफ्तार कर बहुचर्चित हत्याकांड का खुलासा किया था।
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