- यमुना प्राधिकरण में मैनेजर से लेकर ओएसडी की भूमिका संदिग्ध, 10 कियोस्क का बैकडेट में जारी किया प्रपत्र
- आवेदकों को आरक्षण के लिए अयोग्य किए जाने के साथ ही पूरे मामले की जांच के आदेश
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। आवासीय भूखंड योजना में आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के अधिकारियों ने बड़ा खेल कर दिया। यमुना सिटी के अलग-अलग सेक्टर में आवंटित किए गए कियोस्क (व्यावसायिक श्रेणी) का पूर्णता प्रमाण पत्र (कंपलीशन) मई से लेकर जुलाई महीने की अलग-अलग तारीख में जारी कर दिया गया।
मौके पर बिना कोई काम हुए ही जारी पूर्णता प्रमाण पत्र के जरिये यह सभी 10 आवेदकों ने यमुना सिटी के आवासीय भूखंड में आरक्षण के लिए आवेदन कर दिया। सबसे अहम बात यह है कि नियमों के विरुद्ध विशेष कार्याधिकारी राजेश कुमार ने फाइल को मुख्य कार्यपालक अधिकारी तक नहीं भिजवाया। प्रबंधक से लेकर ओएसडी ने इन 10 कियोस्क का पूर्णता जारी किया था। मामला का खुलासा होने के बाद इन सभी 10 कियोस्क आवंटियों का पूर्णता प्रमाण पत्र अवैध करार कर दिया गया है। इसके साथ ही इन्हें आवासीय भूखंड में आरक्षण के लिए अयोग्य भी कर दिया गया है। सीईओ डा. अरुणवीर सिंह ने इस पूरे मामले में प्रबंधक व्यावसायिक सिद्धार्थ चौधरी, उपमहाप्रबंधक अशोक कुमार और ओएसडी राजेश कुमार सहित फाइल पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारियों की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए जांच के आदेश दिए हैं। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रुति से एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम कार्रवाई के लिए शासन को संस्तुति की जाएगी।
खाली जमीन पर दे दिया फंक्शनल प्रमाण पत्र
यमुना सिटी के सेक्टर-32 में अतुल गुप्ता, अंकित गुप्ता, सेक्टर-22 डी में रिया कौशिक, रजत कौशिक, कृष्ण कुमार अग्रवाल, सेक्टर -20 में गोपेश शर्मा, सेक्टर-17 में आस मोहम्मद के अलावा शैलेंद्र गुप्ता, नंदिनी गर्ग, मयंक गुप्ता को कियोस्क आवंटित किए गए हैं। इन कियोस्क का निर्माण लंबे समय से लंबित है। मगर, यमुना सिटी की आवासीय भूखंडों की स्कीम के साथ ही इनकी फाइलों में कागजी कार्रवाई शुरू हो गई। 20 मई 2024 से लेकर 16 अगस्त 2024 के बीच इन सभी कियोस्क आवंटियों को पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इस प्रक्रिया में पूरी तरह से धांधली की गई। सीईओ तक फाइल भेजने के बजाय ओएसडी के हस्ताक्षर के बाद ही पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किया गया है।
इस लाभ के चक्कर में किया गया है खेल
दरअसल, प्राधिकरण में व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्ति का स्वामी अगर अपने भूखंड पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर देता है और उसका पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त कर लेता है तो वह आवासीय भूखंड में आरक्षण का लाभ ले सकता है। सबसे अहम बात यह है कि 7.5 मीटर के कियोस्क के संचालन के बाद उसे एक हजार या इससे ज्यादा तक के आवासीय भूखंड योजना में आरक्षण का अधिकार मिल जाएगा। यही कारण है कि वर्षों पुराने आवंटियों को आनन फानन में यमुना सिटी के आवासीय भूखंड योजना के लाभ के लिए अवैध तरीके से जारी किया गया।
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यमुना सिटी के अलग-अलग सेक्टर में आवंटित किए कियोस्क (व्यावसायिक श्रेणी) का पूर्णता प्रमाण पत्र (कंप्लीशन) मई से लेकर जुलाई महीने की अलग-अलग तारीख में जारी किया गया है। इस मामले में मैनेजर से लेकर ओएसडी तप्की भूमिका संदिग्ध है। पूरी जांच कराई जा रही है।
डाॅ. अरुणवीर सिंह, सीईओ