सरकारी अस्पताल में चल रहा कमीशन का खेल
-महिला वार्ड और इमरजेंसी से मरीजोंं को निजी अस्पतालों में रेफर करने की शिकायतें
-अस्पताल प्रशासन ने निजी एंबुलेंस का प्रवेश किया प्रतिबंधित, सीसीटीवी से निगरानी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए पहुंच रहे मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने वाला गैंग सक्रिय हैं। इसमें अस्पताल के कर्मचारियों से लेकर डॉक्टर भी शामिल हैं। मरीजों की हालत गंभीर बताकर बाहर खड़ी निजी अस्पतालों की एंबुलेंस के हवाले किया जा रहा है। इसके एवज में कर्मचारी और डॉक्टर मोटा कमीशन ले रहे हैं।
अस्पताल प्रशासन को इस बात की जानकारी हुई तो तत्काल सख्त कदम उठाए गए हैं। निजी अस्पतालों की एंबुलेंस का परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही निगरानी के लिए गेट पर सीसीटीवी कैमरे भी लगा दिए गए हैं। जिला अस्पताल सेक्टर-39 में शिफ्ट होने के बाद यहां कई तरह की नई सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। पहले अस्पताल में इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) की सुविधा उपलब्ध नहीं थी, लेकिन अब 20 बेड की क्षमता के दो आईसीयू शुरू कर दिए गए हैं। स्वास्थ्य निदेशालय की तरफ से सख्त निर्देश हैं कि अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों को जरूरत पड़ने पर ही रेफर किया जाए।
अस्पताल की इमरजेंसी के अलावा स्त्री रोग विभाग से इस तरह की कई शिकायतें मिलने के बाद मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रेनू अग्रवाल ने जांच कराई तो आरोप सही पाए गए। निजी अस्पतालों के कर्मचारी और एंबुलेंस कर्मी सक्रिय पाए गए। 200 से 400 रुपये कमीशन लेकर मरीजों को इनके सुपुर्द किया जा रहा था। इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त कर्मचारियों को सख्त चेतावनी दी गई है। कुछ की शिकायत शासन को भी भेजी गई है।
22 कैमरों की निगरानी, एक ही दरवाजे से प्रवेश
अस्पताल प्रशासन ने मरीजों को रेफर करने के खेल पर अंकुश लगाने के लिए 22 सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए हैं। अस्पताल के गेट नंबर तीन से ही सरकारी एंबुलेंस आ-जा सकेंगी। शाम पांच बजे के बाद अस्पताल के सभी गेट बंद कर दिए जाएंगे। सुरक्षा कर्मियों की निगरानी में केवल गेट नंबर पांच से ही मरीज-तीमारदार और स्टाफ आवाजाही कर सकेगा।
रेडियोलॉजी विभाग पर भी सीएमएस की नजर
पिछले दिनों अल्ट्रासाउंड में देरी के कारण मरीज की मौत हो गई थी। इसी दिन लोगों ने कर्मचारियों पर 400 रुपये लेकर अल्ट्रासाउंड और एक्सरे करने के आरोप भी लगाए थे। यहां से भी मरीजों को रेफर करने की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने रेडियोलॉजी विभाग के रजिस्ट्रेशन काउंटर के ऊपर सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए हैं, जिस पर सीधे सीएमएस नजर रख रही हैं।
ज्यादा काम पर इनाम की व्यवस्था
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रेनू अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल के पंजीकरण काउंटरों पर उमड़ रही भीड़ से निपटने के लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई गई है। जो कर्मचारी सबसे ज्यादा पंजीकरण करेंगे उन्हें 15 अगस्त को इंसेंटिव से सम्मानित किया जाएगा। इस कदम से भी मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर करने के झंझट से छुटकारा मिल जाएगा।