ग्रेटर नोएडा। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में वैश्वीकरण और तेजी से बढ़ती तकनीकी दुनिया में बौद्ध मनोविज्ञान की प्रासंगिकता पर आयोजित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का रविवार को समापन हुआ। बौद्ध धर्म इन ए ग्लोबलाइज्ड एंड टेक्नोलॉजाइज़्ड वर्ल्ड इनसाइट्स फ्रॉम द बुद्धिस्ट साइंस ऑफ माइंड’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में 10 देशों के विद्वानों और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान 26 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। जीबीयू के डीन अकादमिक एवं डीन, स्कूल ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज एंड सिविलाइजेशन प्रो. राजीव वार्ष्णेय ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में मन और मानवीय व्यवहार को समझना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। अंतरराष्ट्रीय मामले एवं स्कूल ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज एंड सिविलाइजेशन के प्रमुख डॉ. चिंतला वेंकट साईं सिवसाई ने कहा कि बौद्ध परंपरा चेतना, मानसिक अवस्थाओं, नैतिक आचरण और आंतरिक कल्याण को समझने का समृद्ध दृष्टिकोण देती है। इस मौके पर जेएनयू के प्रो. सी उपेंद्र राव व डॉ. रॉल्फ शेरुमेन आदि मौजूद रहे। ब्यूरो