जेवर। एयरपोर्ट का निर्माण कार्य शुरू होने से पहले चहारदीवारी पूरी करने का काम लगभग 70 प्रतिशत पूरा हो चुका है। निर्माणकर्ता कंपनी अब जिन जगहों पर चहारदीवारी का काम बाकी है, उन जगहों पर काम पूरा करने में जुटी हुई है। बृहस्पतिवार को निर्माणकर्ता कंपनी की टीम रन्हेरा गांव की जमीन पर चहारदीवारी बनाने के लिए पहुंची, तो ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को समझाकर चहारदीवारी का काम शुरू कराया।
एयरपोर्ट के रनवे, टर्मिनल बिल्डिंग आदि के निर्माण कार्य की जिम्मेदारी टाटा प्रोजेक्ट्स को मिली है। टाटा प्रोजेक्ट्स में एयरपोर्ट की जमीन पर अपना स्थानीय कार्यालय बनाने के साथ ही काम शुरू करने से पहले की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। टाटा प्रोजेक्ट्स सामान के अलावा निर्माण कार्य में जुटे मजदूरों की सुरक्षा के मद्देनजर एयरपोर्ट की चहारदीवारी का काम पूरा होने के बाद ही अंदर सामान लाने एवं काम शुरू कराने पर विचार कर रही है। एयरपोर्ट की चहारदीवारी का लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। बीच-बीच में कुछ जगह पर जहां चहारदीवारी नहीं हुई है उन जगहों पर निर्माणकर्ता कंपनी की टीमें चहारदीवारी का काम करने में जुट गई हैं।
बृहस्पतिवार को एक टीम रणहेरा गांव के किसानों की जमीन पर चहारदीवारी का काम करने के लिए पहुंची, तो किसानों ने अपनी मांगे रखते हुए निर्माण कार्य बंद करने को कहा। टीम ने इसकी सूचना पुलिस एवं प्रशासन को दी, जिसके बाद जेवर तहसीलदार अखिलेश कुमार एवं उप निरीक्षक यशपाल शर्मा पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। काफी देर तक किसानों को समझाते हुए किसी तरह आश्वासन देकर चहारदीवारी का काम शुरू कराया।
नौकरी या एकमुश्त राशि देने की मांग
एयरपोर्ट की चहारदीवारी के कार्य में जुटी टीम बृहस्पतिवार को रन्हेरा निवासी वीरेंद्र सिंह व अन्य की जमीन पर काम करने के लिए पहुंची। किसानों की मांग थी कि जो बच्चे अब 18 वर्ष के हो गए हैं, उन बच्चों को नौकरी या उसके बदले एकमुश्त राशि मिलनी चाहिए। जमीन जाने से उन बच्चों की भी आजीविका प्रभावित हुई है। प्लॉट, परिसंपत्ति और चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर कुछ किसान परेशान हैं। एयरपोर्ट के लिए दयानतपुर, रन्हेरा, रोही, पारोही, बनवारीवास और किशोरपुर गांवों के किसानों की 1351 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया था । वहीं रोही, नगला गणेशी, नगला फूल खां, नगला छीतर नगला शरीफ व दयानतपुर खेड़ा के अलावा किशोरपुर के कुछ घरों को विस्थापित किया गया था। इन गांवों के कुछ किसान अभी भी प्लॉट आवंटन, खेतों में खड़े पेड़, बोरिंग, ट्यूबवेल, मकान आदि परिसंपत्ति व 4 गुना मुआवजे की मांग को लेकर आज भी मांग उठाते रहते हैं।