परिजन कहते हैं आमतौर पर रंजिश और अपराध का कारण जर, जोरू या जमीन होती है, लेकिन अनिल के सामने इस तरह की कोई परिस्थिति नहीं थी। अनिल के बड़े भाई भोपाल नागर ने ग्रामीणों से कहा कि वे उसे सेना में भेजना चाहते थे, लेकिन बुरी संगत के कारण अनिल गलत रास्ते पर चला गया।
ग्रेटर नोएडा के दुजाना गांव में शुक्रवार को शोक का माहौल था। गांव में अधिकांश दुकानें बंद थी। लोग अनिल के संबंध में खुलकर जानकारी देने से लोग कतरा रहे थे। गांव में सुबह से ही लोगों का आना जाना शुरू हो गया था। अनिल के परिजन-भाई आदि के साथ बैठकर लोग चर्चा कर रहे थे कि अनिल के जरायम की दुनिया में आने की कोई ठोस वजह नहीं थी। पूरा परिवार पढ़ा लिखा है, रुपये पैसे की भी कमी नहीं थी।
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परिजन कहते हैं आमतौर पर रंजिश और अपराध का कारण जर, जोरू या जमीन होती है, लेकिन अनिल के सामने इस तरह की कोई परिस्थिति नहीं थी। अनिल के बड़े भाई भोपाल नागर ने ग्रामीणों से कहा कि वे उसे सेना में भेजना चाहते थे, लेकिन बुरी संगत के कारण अनिल गलत रास्ते पर चला गया।
अनिल के दुजाना गांव स्थित पैतृक मकान में साफ-सफाई आदि बृहस्पतिवार शाम से ही शुरू कर दी गई थी। शुक्रवार को दिन निकलते ही इसी मकान में लोगों का शोक संवेदना प्रकट करने आने का सिलसिला शुरू हुआ। परिजनों और ग्रामीणों के मुताबिक पढ़ाई के दौरान अनिल सामान्य छात्रों की तरह था। कभी स्कूल या गांव में उसका किसी से विवाद भी नहीं हुआ था। अनिल के परिवार के अधिकतर लोग गांव से बाहर रहते हैं। बड़े भाई भोपाल नागर सेना के सूबेदार पद से रिटायर होने के बाद आईबी में तैनात थे। भोपाल ने बताया कि उन्हें तो ये तक नहीं पता कि वर्ष 2002 में अनिल ने पहली हत्या क्यों की थी।
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नाम से दुजाना हटाने पर जेल से की कॉल
अनिल नागर अपने नाम के आगे दुजाना लगाना पसंद करता था। हालांकि गांव के कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति जताई थी। लोगों का कहना था कि अनिल के नाम में दुजाना नाम जुड़ने से गांव का नाम खराब होता है। उन्होंने पुलिस-प्रशासन को भी पत्र देकर अनिल के नाम के आगे दुजाना का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की थी। इसकी जानकारी मिलते ही अनिल ने शिकायत करने वाले ग्रामीण के मोबाइल पर कॉल कर धमकी भरे लहजे में पूरा मामला पूछा और आगे से ऐसा न करने की हिदायत दी थी।
सेना की भर्ती परीक्षा में हुआ था फेल
ग्रामीणों के मुताबिक वर्ष 1997 में हाईस्कूल पास करने के बाद अनिल दुजाना सेना भर्ती परीक्षा में शामिल होने के लिए हैदराबाद गया था। शारीरिक परीक्षा में वह पास हो गया था लेकिन लिखित परीक्षा में फेल हो गया था। परिजनों ने उसे पढ़ाई जारी रखने के लिए कहा। मगर वह नहीं माना। जल्द ही वह असामाजिक तत्वों के साथ उठने-बैठने लगा था। वर्ष-2002 में उसने हत्या की पहली वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद वह लगातार अपना रौब बढ़ाता चला गया। क्षेत्र में राजनीति के अलावा गांव में छोटे-छोटे पंचायत फैसलों में भी हस्तक्षेप करने लगा था। गांव की पंचायत में फैसले के दौरान उसका सिक्का चलता था।