फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का खुलासा, पूर्व रणजी खिलाड़ी समेत तीन गिरफ्तार
सेक्टर-132 में था सर्वर, अंतरराष्ट्रीय कॉल को अवैध तरीके से लोकल नेटवर्क में बदल रहे थे आरोपी
एसटीएफ और नोएडा पुलिस की कार्रवाई में हुआ खुलासा, फरार आरोपियों की तलाश जारी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। अंतरराष्ट्रीय कॉल को अवैध तरीके से लोकल नेटवर्क में बदलकर कॉलिंग करवाने वाले अवैध टेलीफोन एक्सचेंज का एसटीएफ और नोएडा पुलिस ने खुलासा किया है। टीम ने सेक्टर-132 में अवैध टेलीफोन एक्सचेंज का खुलासा कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। एक आरोपी रणजी ट्रॉफी खेल चुका है। इस एक्सचेंज से भारत सरकार को आर्थिक नुकसान हो रहा था, साथ में देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर भी खतरा था।
एक सूचना पर एसटीएफ की टीम और कोतवाली सेक्टर-126 पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए सेक्टर-132 के बी ब्लॉक में सिफी डाटा सेंटर में दबिश दी गई। यहां दूरसंचार विभाग के तकनीकी टीम को बुलाया गया। इसमें पता चला कि यहां फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज चल रहा है।
आरोपी भारत सरकार को चूना लगाते हुए यहां इंटरनेट कनेक्शन से वीआईओपी कॉल के माध्यम से इंटरनेशनल कॉल को लोकल में बदलते थे। इसकी जानकारी भारत सरकार और किसी एजेंसी को नहीं थी। यहां से पुलिस ने द्वारका, दिल्ली निवासी मोहम्मद शोएब, गुरुग्राम निवासी अभिषेक श्रीवास्तव और आशुतोष बोरा को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ के एएसपी राजकुमार मिश्रा ने बताया कि आशुतोष अंडर-19 और अंडर-23 में झारखंड से रणजी ट्रॉफी खेल चुका है। तीनों कई महीने से फर्जीवाड़ा कर कर रहे थे। इसमें कई अन्य आरोपी भी शामिल हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
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आईपीएल में खिलाने के नाम पर भी करते हैं ठगी
आरोपी आशुतोष रणजी ट्रॉफी में खेल चुका है लेकिन अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया तो ठगी के काम में लिप्त हो गया। वह रणजी ट्रॉफी और आईपीएल खिलाने का प्रलोभन लेकर ठगी करने लगा। धीरे-धीरे वह ठगी के अलग-अलग तरीकों पर काम किया और अब फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज से जुड़ गया था।
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जेल में हुई मुलाकात और बना लिया गिरोह
आशुतोष वर्ष 2021 में मुंबई के आजाद मैदान थाने से ठगी के मामले में जेल गया था। करीब तीन महीने तक जेल में रहा था। इसके बाद आठ लाख की ठगी के मामले में गुरुग्राम से जेल गया था। जेल में आशुतोष की मुलाकात आरोपी सोनू से हुुई थी। सोनू ने ही फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज की जानकारी आशुतोष को दी और जेल से बाहर आने के बाद फर्जीवाड़ा शुरू कर दिया।
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ऐसे चलता था फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज
सेक्टर-132 में फर्जी गिरोह का ऑफिस था और यहां पर सर्वर रखा था। ऑफिस में पूरा सेटअप था लेकिन यहां कोई बैठता नहीं था। पूरा सिस्टम रिमोट के आधार पर चलता था। आरोपी टेलीकॉम से कनेक्शन लेकर गेटवे के माध्यम से सर्वर में कनेक्ट कर इंटरनेट से कंट्रोल करते थे। इंटरनेशनल कॉलिंग को इंडिया में गेटवे के माध्यम से लैंड करवाते थे। इसमें लोकेशन विदेश का शो नहीं हो रहा था लेकिन टेलीकॉम कंपनी का नंबर नोएडा एसटीडी कोड से दिख रहा था। पूरे सर्वर को एक खास साफ्टवेयर के माध्यम से आशुतोष कंट्रोल कर रहा था। आरोपी खाड़ी देशों और पाकिस्तान से आने वाले कॉल को डायवर्ट कराकर दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई राज्यों के लोगों की कॉलिंग करा रहे थे। खाड़ी देशों में रहने वाले लोग परिजनों से कम पैसे में बात कर रहे थे। आरोपी दूरसंचार विभाग और भारत सरकार से अलग एक अपनी लाइन बना ली थी जिसका कुछ भी पैसा नहीं लगता था। इससे विदेश से कॉल करने वाले लोगों की कम पैसे में बात हो जाती थी और गिरफ्तार आरोपियों को जितना भी पैसा मिलता था वह पूरी कमाई ही थी।
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आरोपियों से बरामदगी
पांच सीपीयू, तीन मोबाइल, सात वाई-फाई राउटर, मैट्रिक्स साॅफ्टवेयर की चार पेन ड्राइव, 45 डेबिट कार्ड, आठ लाख खाते में किए सीज।