फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Noida News: कुवैत से चल रहे नकली नोट के कारोबार का नोएडा में पर्दाफाश

विज्ञापन
विज्ञापन
कुवैत से चल रहे नकली नोट के कारोबार का पर्दाफाश
विज्ञापन

अंतरराज्यीय गिरोह के पांच आरोपी गिरफ्तार, बिहार से हो रही थी सप्लाई, सरगना फरार

- पुलिस ने 6.48 लाख रुपये के नकली नोट बरामद किए




माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। नोएडा पुलिस ने कुवैत से चल रहे नकली नोट खपाने के काले कारोबार का खुलासा किया है। कोतवाली सेक्टर-24 पुलिस ने गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से 6.48 लाख रुपये के नकली नोट बरामद हुए हैं। गिरोह के बदमाश छपरा (बिहार) से नकली नोट लाकर इंस्टाग्राम ग्रुप बनाकर ग्रुप के सदस्यों के माध्यम से खपाते थे। पुलिस गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगा रही है।


नोएडा के एडीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी का कहना है कि आरोपियों की पहचान अलीगढ़ के टप्पल निवासी हरिओम सिंह, जयपुर निवासी आयुष गुप्ता, दिल्ली के कोटला निवासी आदित्य गुप्ता, लखनऊ निवासी शिबू खान और फैज खान के रूप में हुई है। छपरा निवासी सरगना सिंघानिया फरार है। सिंघानिया ही जालसाजों को नकली नोट उपलब्ध कराता था। इस मामले में तीन बदमाश फरार हैं। पेपर की खराब गुणवत्ता और सभी नोट का सीरियल नंबर एक जैसा होने से पुलिस ने असली और नकली में अंतर कर लिया। नोट की पहचान वाले मोबाइल एप का भी सहारा लिया गया। मामला संज्ञान में आते ही इंटेलीजेंस ब्यूरो सहित अन्य केंद्रीय और राज्य की एजेंसियां भी जांच में लग गई हैं।
विज्ञापन



-

इंस्टाग्राम पर चल रहा था फर्जी करेंसी का अकाउंट

जालसाजों ने बताया कि इंस्टाग्राम पर एक फर्जी करेंसी अकाउंट बनाया हुआ था। यह अकाउंट वेब सीरीज ‘फर्जी’ देखने बाद बनाया। वेबसीरीज से यह आइडिया दिमाग में आया था। वेब सीरीज में नकली नोट के खेल को दिखाया गया है। इसके बाद इंस्टाग्राम पर अकाउंट बनाकर लोगों से ये जालसाज संपर्क करने लगे और कमीशन के आधार पर असली रकम देकर दो गुना तक नकली करेंसी देते थे। आरोपी व्हाट्सएप के वर्चुअल नंबर से नकली भारतीय मुद्रा को बिहार व दिल्ली से मंगाकर बाजारों में चला रहे थे।

-
सऊदी में नौकरी और एयरलाइंस की नौकरी छोड़ बनाया गिरोह


आरोपी हरिओम पहले दिल्ली की एक एयरलाइंस में नौकरी करता था। आयुष शहर के निजी विश्वविद्यालय का बीसीए का छात्र है। आयुष और आदित्य बीएससी के छात्र हैं। गिरोह का अहम किरदार फैज कुवैत तो शिबू सऊदी अरब में नौकरी कर रहे थे। मार्च-अप्रैल में ही नौकरी छोड़कर नकली नोट खपाने के धंधे में पूरी तरह उतरने को आए थे। ये लोग कुवैत और सऊदी से इंस्टाग्राम ग्रुप पर सक्रिय रहकर कामकाज देख रहे थे।

-

नकली नोट का कुवैत और सऊदी कनेक्शन

फैज खान कुवैत में रहकर लोगों से संपर्क करता था और फरार बदमाश मोबिन के माध्यम से लोगों तक नकली नोट पहुंचाता था। वहीं सउदी अरब के जद्दा में प्राइवेट टैक्सी चलाने वाला शिबू खान भी फैज से संपर्क कर नकली नोट का कारोबार पूरे देश में फैला रहा था। शिबू और फैज एक माह पहले ही भारत आए हैं। शिबू ने पुलिस को बताया कि वह भाई मोबिन और फैज के साथ छपरा के सिंघानिया नामक व्यक्ति से नकली करेंसी लेकर आता था और उसे दस से 15 प्रतिशत लाभ पर डिलिवरी करता था।
विज्ञापन


-

ऐसे पकड़ में आए गिरोह के बदमाश

कोतवाली प्रभारी अमित कुमार ने बताया कि पुलिस ने सबसे पहले हरिओम को मोरना से नकली नोट के साथ गिरफ्तार किया। जब उससे पूछताछ की गई तो परतें खुलने लगी और इस बड़े गिरोह का खुलासा हुआ। हरिओम ने बताया कि नकली नोट आयुष से लिया था। दोनों की मुलाकात इंस्टाग्राम के फेक करेंसी अकाउंट ग्रुप पर हुई थी। आयुष ने हरिओम को बताया कि वह जितने हजार रुपये के असली नोट देगा उसका दोगुना वह नकली नोट उपलब्ध कराएगा। लालच में आकर हरिओम ने अपने भाई के खाते से 15 हजार रुपये आयुष के खाते में डलवा दिए। नोएडा आकर आयुष ने हरिओम को पैसे दिए। इसके बाद आयुष ने बताया कि ‘फर्जी’ वेबसीरीज देखने के बाद फरवरी में उसने इंस्टाग्राम पर ‘फेक करेंसी’ नामक अकाउंट खोला। इसी के माध्यम से वह फैज के संपर्क में आया और उसके कहने पर नकली नोट लेकर लोगों को सप्लाई करने लगा। आयुष को मोबिन और शिबू नकली नोट देते थे। इसी तरह से अन्य आरोपित भी शिबू और फैज के संपर्क में आए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें