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Noida News: ड्रग्स फैक्टरी संचालक चिडी व साइमन के आका की गिरफ्तारी बाकी

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ड्रग्स फैक्टरी संचालक चिडी व साइमन के आका की गिरफ्तारी बाकी
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- दिल्ली से फरार माइकल के अलावा कोई और भी हो सकता है अवैध धंधे का मास्टरमाइंड
- टीम दे रही हैं दबिश, माइकल की गिरफ्तारी से पुलिस को अगली कड़ी मिलने की उम्मीद
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। थीटा-2 सेक्टर और मित्रा सोसाइटी के मकान मेें चल रही दो ड्रग्स फैक्टरी के भंडाफोड़ करने के बाद पुलिस इस अवैध धंधे की सभी परत उधेड़ने का प्रयास कर रही है। इन दोनों फैक्टरियों का संचालन गिरफ्तार आरोपी चिडी अजिग्वा और साइमन कर रहे थे, लेकिन ग्रेटर नोएडा से देश के कई हिस्सों में ड्रग्स तस्करी के अवैध धंधे का मास्टरमाइंड और पकड़े गए आरोपियों के आका की गिरफ्तारी अभी बाकी है।
दो ड्रग्स फैक्टरियों से 350 करोड़ रुपये की ड्रग्स बरामद कर नाइजीरियाई आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है। इसमें चिडी, साइमन व अन्य आरोपियों से पूछताछ में वसंत कुंज से फरार चल रहे माइकल का नाम सामने आया है। माइकल की गिरफ्तारी के बाद न केवल यह स्पष्ट होगा कि अवैध धंधे का मास्टर माइंड कौन है, बल्कि अवैध धंधे में और बड़ा खुलासा हो सकता है।
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दरअसल पुलिस को थीटा-2 सेक्टर स्थित ड्रग्स फैक्टरी से मिले एक रजिस्टर व तीन डायरियों में वर्ष 2020 से आरोपियों की उपस्थिति के साक्ष्य मिले हैं। पहले चार आरोपियों से पूछताछ में माइकल का नाम सामने आया। माइकल और उसके साथियों पर देश के चार राज्यों दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और गोवा में ड्रग्स तस्करी की जिम्मेदारी थी। इधर चिडी और साइमन के अलावा अब तक इस धंधे का मास्टरमाइंड माइकल माना जा रहा है। लेकिन पहली फैक्टरी के खुलासे के बाद ही वह दिल्ली से फरार हो गया था। हालांकि अब इस मामले में अभी मुंबई, गोवा में ड्रग्स की डिलिवरी लेने वाले और उन्हें कार्गो व विदेश तक पहुंचाने वाले आरोपियों की तलाश है।
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छत से कूदने में घायल हुआ था चिडी
थीटा-2 सेक्टर स्थित मकान की ड्रग्स फैक्टरी में दबिश के दौरान चिडी पुलिस से बचने के लिए छत से कूदकर घायल हो गया था और मकान को घेरे खड़ी पुलिस टीम ने उसे दबोच लिया था। घायल होने के कारण ही उसे प्रेसवार्ता में शामिल नहीं किया गया था। हालांकि पुलिस ने बाद में उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की।
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ऑन डिमांड भेजी जा रही थीं ड्रग्स
पुलिस का कहना है कि आरोपी टेलीग्राम, व्हाट्सएप और डार्क वेब के माध्यम से ग्राहकों को न केवल तलाशते थे, बल्कि इसी माध्यम से ड्रग्स के आर्डर लेते थे। इसके बाद ऑन डिमांड ड्रग्स ग्रेनो से दूसरे राज्य व शहरोें में ड्रग्स भेजी जाती थीं। आरोपियों से बरामद अधिकांश मोबाइल के अभी लॉक नहीं खुल पाए हैं। अधिकांश आरोपियों ने पूछताछ में भी मोबाइल के पासवर्ड पुलिस को नहीं बताये। इसके चलते पुलिस आरोपियों के व्हाट्सएप व टेलीग्राम अभी चेक नहीं कर पाई है।
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