साइबर जालसाज आईडी हैक कर डोमेन बदलकर कंपनियों को पहुंचा रहे नुकसान
सुशांत समदर्शी
नोएडा। साइबर जालसाज ई-मेल आईडी में डॉट व स्पेलिंग में हेराफेरी कर करोड़ों का वारा न्यारा कर रहे हैं। इस तरह की जालसाजी ई-मेल आईडी हैक कर की जा रही है और बड़ी कंपनियों व प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। वहीं साइबर जालसाज ई-मेल आईडी का डोमेन बदलकर भी आसानी से ठगी कर रहे हैं और शुरुआत में किसी को भनक भी नहीं लग रही।
नोएडा व ग्रेटर नोएडा में हजारों बड़ी कंपनियां और प्रतिष्ठान हैं, जिनका विदेशी कंपनियों के साथ आयात-निर्यात का काम होता है। खासकर गारमेंट, आईटी, इलेक्ट्रिक्स एंड इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में विदेशी कंपनियों के साथ डील होती है। यह डील या आयात-निर्यात ईमेल के माध्यम से होता है। ऐसे में साइबर ठग इस डील में भी जालसाजी कर करोड़ों का फ्रॉड कर रहे हैं। दरअसल ये साइबर जालसाज कंपनियों की ई-मेल आईडी हैक कर लेते हैं और उसमें डॉट या स्पेलिंग को इधर से उधर कर देते हैं। इसके बाद बदली हुई ई-मेल से डील होने वाली कंपनी से बात कर हजारों डॉलर या अन्य करेंसी अपने खाते में डलवा लेते हैं। इस तरह की ठगी नोएडा व ग्रेटर नोएडा में लगातार हो रही हैं। साइबर क्राइम थाने की प्रभारी निरीक्षक रीता यादव का कहना है कि डॉट व डोमेन बदलकर ई-मेल आईडी से ठगी की घटनाएं हो रही हैं। इसके लिए कंपनियों के लोगों से ई-मेल के साथ-साथ अन्य माध्यमों से भी संपर्क में रहना चाहिए।
ऐसे हो रही साइबर ठगी
दरअसल दो कंपनियों के बीच आयात-निर्यात को लेकर जब ई-मेल से बातचीत चलती रहती है तो साइबर जालसाज एक तरफ की कंपनी की ई-मेल आईडी हैक कर लेते हैं। इसके बाद ई-मेल आईडी में डॉट या स्पेलिंग मिस्टेक कर मिलती जुलती ई-मेल आईडी बना लेते हैं। इसके बाद नई ई-मेल आईडी से बातचीत कर सामान दूसरी कंपनी को निर्यात करने की बात कहकर रकम अपने खाते में मंगवा लेते हैं। इस तरह की ठगी में कई बार डोमेन भी बदला जाता है।
क्या होता है डोमेन
डोमेन एक तरह का वेब एड्रेस होता है, जिससे इंटरनेट पर उस वेबसाइट को पहचाना जाता है। एक डोमेन नाम एक आईपी पते के लिए होता है, जिसे आईपी पते की तुलना में आसानी से याद कर सकते हैं। सरल शब्दों में यह आईपी एड्रेस का पठनीय संस्करण है। किसी एक डोमेन नाम की मदद से हम एक या एक से अधिक आईपी पते पा सकते हैं। उदाहरण के लिए डॉट कॉम, डॉट इन जैसे डोमेन नाम हैं, जो सैकड़ों आईपी को संदर्भित करता है।
नोएडा प्राधिकरण के खाते से भी डोमेन बदलकर हुई थी ठगी
कुछ महीने पहले जालसाज ने नोएडा प्राधिकरण के खाते से करीब चार करोड़ रुपये की निकासी कर ली थी और करीब दो सौ करोड़ रुपये पर हाथ साफ करने की तैयारी थी। इन जालसाज ने भी ई-मेल आईडी व डोमेन बदलकर साइबर ठगी को अंजाम दिया था। इससे पहले नोएडा की कई कंपनियों के साथ इस तरह की जालसाजी हुई है। कोविड के वक्त नोएडा की एक कंपनी ने यूएसए की कंपनी से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के लिए संपर्क किया था और डील भी हो गई थी, तभी साइबर ठगों ने ई-मेल में खेल कर करोड़ों की ठगी कर ली थी।