डॉग पॉलिसी में संशोधन की तैयारी, आईपीसी की धारा-289 के तहत होगी कार्रवाई
- अभी पालतू कुत्ते के काटने पर मालिक पर होता है 10 हजार का जुर्माना
मनोज कुमार
ग्रेटर नोएडा। सेक्टरों-सोसाइटियों एवं गांवों में आए दिन कुत्ते के काटने से विवाद की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसे देखते हुए प्राधिकरण इसी माह से डॉग पालिसी में कुछ बदलाव करने जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक प्राधिकरण जुर्माने और सजा के मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा-289 के तहत कार्रवाई का नियम लागू करने जा रहा है। इसी माह प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में इसका प्रस्ताव रखा जाएगा। प्रस्ताव में पालतू जानवर के काटने से हुई क्षति पर लगाए जाने वाले जुर्माने को कम किया जा सकता है। अहम है कि ग्रेनो में अप्रैल के अंत तक एप के माध्यम से पालतु कुत्तों का पंजीकरण शुरू हो जाएगा।
एक आकलन के मुताबिक ग्रेटर नोएडा शहर में करीब 10 हजार कुत्ते हैं। इनमें तीन से चार हजार कुत्ते पालतू हैं। ग्रेनो प्राधिकरण ने नोएडा में लागू डॉग पालिसी को अपनाना शुरू किया था। मगर हाल ही हुई घटनाओं को देखकर इसमें बदलाव करने की जरूरत महसूस की जा रही है। प्राधिकरण ने पिछले दिनों ग्रेनो वेस्ट में पालतू कुत्ते के काटने के बाद मालिक पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। मगर अब नियम में संशोधन करने की तैयारी चल रही है।
क्या है आईपीसी की धारा-289
भारतीय दंड संहिता की धारा-289 के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति अपने कब्जे में किसी जंतु को रखता है और वह दूसरे व्यक्ति को घोर क्षति पहुंचाता है। ऐसी सूरत में छह माह का कारावास या एक हजार रुपये अथवा दोनों दंड एक साथ दिए जा सकते हैं।
विदेशी नस्ल के हिंसक कुत्ते पालने पर पांबदी की तैयारी
गाजियााबद के बाद अब ग्रेटर नोएडा में लोगों की ओर से विदेशी नस्ल के हिंसक कुत्ते पालने पर पांबदी लगाने की मांग उठने लगी है। लोगों की ओर से प्राधिकरण को पत्र लिखकर हिंसक प्रवृति के कुत्ते पालने पर रोक लगाने की मांग की जा रही है। प्राधिकरण अधिकारी भी इस प्रस्ताव पर मंथन कर रहे हैं। बताय जा रहा है कि बोर्ड बैठक में इसका प्रस्ताव रखा जाएगा। वहीं डॉग की ब्रीडिंग कराने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाने की तैयारी है। जबकि किसी दूसरी नस्ल के डॉग से क्रॉस कराने पर भी पांच हजार का जुर्माना लगाया जाएगा।
प्राधिकरण लेगा गांव और लावारिस कुत्तों की जिम्मेदारी
अधिकारियों के मुताबिक लावारिस कुत्तों की नसबंदी और रेबीज वैक्सीनेशन कराने की जिम्मेदारी प्राधिकरण की होगी। जिन गांव-सेक्टर या सार्वजनिक स्थानों पर कोई आरडब्ल्यूए व एओए नहीं है। उनकी भी जिम्मेदारी प्राधिकरण की होगी। वहीं सेक्टर और सोसाइटी में यह जिम्मेदारी आरडब्ल्यूए या एओए की होगी।